नीमच। आवारा और खूंखार कुत्तों ने नीमचवासियो का जीना दुश्वार कर दिया है। कुत्तों को लेकर हालात इतने भयावह हो गए हैं कि शहर की जनता को घर से निकलने से पहले सोचना पड़ता है कि कहीं कुत्तों का झुंड हमला तो नहीं कर देगा। मालवा के पेरिस कहे जाने वाले नीमच के चप्पे-चप्पे में खूंखार कुत्तों के भौंकने की डरावनी गुंज सुनाई देती है। अब तो कुत्तों के डर से लोग नीमच आने से कतरने लगे हैं। जिससे बात करो वह यही कहता है कि साहब कुत्तों के आतंक से बचने के लिए कुछ तो जतन करो। नगरपालिका का पूरा अमला इस समस्या का समाधान करने में निहायत असहाय और लाचार नज़र आता है।नीमच के जिला अस्पताल के डॉग बाइट के कुछ आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हुए दिखाई देंगे की नीमच की जनता आवारा कुत्तों के आगे किस कदर बेहाल है। माह जनवरी में डॉग बाइट के 995 और फरवरी में 750 केस आए। पिछले दो दिन की बात करें तो करीब सांठ के आसपास डॉग बाइट के शिकार लोग जिला अस्पताल पहुंचे हैं।कल 35 और आज दिन में 1 बजे तक 20 लोग डॉग बाइट के शिकार हो गए। यह तो चंद वह आंकड़े हैं जो जिला अस्पताल में पहुंचे हैं, बाकी अन्य जगहों पर पहुंचने वाले घायलों की गिनती अलग है।नगर पालिका के जिम्मेदार या तो कुत्तों की नसबंदी का ढिंढोरा पीटते है,या फिर कानूनी मजबूरी बता के पिंड छुड़ा लेते है। नीमच शहर आवारा कुत्तों की ज़द में है,और जिम्मेदार खामोश है। शायद सभी जिम्मेदारों को बड़े हादसे का इंतजार है। केवल मीटिंग और ज्ञापन से आवारा कुत्तों से निजात नहीं मिल सकती, इतनी सी बात हमारे जन प्रतिनिधियों को समझ में क्यों नहीं आती।