खरगोन। जिले के ग्राम देवली और कोठा बुजुर्ग में रबी सीजन के दौरान लगाया मक्का बीज बगैर परागण की अवस्था में ही फसल सूखने के कारण किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में कृषि विभाग के जांच दल ने भी किसानों की शिकायत सही पाते हुए अपने जांच प्रतिवेदन में बीज को अमानक करार दिया है।
मंगलवार को मुआवजे सहित संबंधित कंपनी पर कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे कृषक नरेंद्र कुमरावत, दिनेश कुमरावत, प्रेम कुमरावत आदि ने बताया कि उन्होंने 4 से 20 नवंबर 2024 के बीच नवभारत सीड्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कृषि मित्र मक्का बीज किस्म खरीदा था। बुआई के बाद समय- समय पर निंदाई- गुडाई, दवाई, खाद आदि का छिडकांव भी किया, लेकिन 80 से 90 दिन की अवस्था में परागण की स्थिति में ही पौधे सूखने लगे। फसलों को चौपट होते देख इसकी शिकायत कृषि विभाग को भी कि, जिस पर कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों के दल ने 15 फरवरी 2025 को खेतों में पहुंचकर निरीक्षण भी किया। इसके बाद कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी और कृषि अधिकारी टीएस मंडलोई द्वारा दिए प्रतिवेदन में पाया गया कि, निम्न गुणवत्ता के बीच के कारण 70 से 80 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है। किसानों ने जांच प्रतिवेदन का हवाला देते हुए उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के साथ ही अन्य किसानों के साथ इस तरह का धोखा न हो इसलिए कंपनी पर भी कार्रवाई की मांग की है।