इंदौर। हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने नगर निगम से पूछा है कि हर महीने पानी का बिल लेने के अलावा संपत्ति कर के साथ 10 फीसदी जल कर किस नियम में जनता से वसूला जा रहा है? दोहरे जल कर की व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने म्युनिसिपल कॉर्पाेरेशन एक्ट भी देखा।
प्रशासनिक जज विवेक रूसिया, जस्टिस गजेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की। याचिका में उल्लेख किया गया कि तत्कालीन महापौर परिषद ने 1 अप्रैल 2020 को प्रस्ताव पारित किया था।
इसके तहत संपत्ति कर के साथ 10 फीसदी अतिरिक्त जल कर भी वसूला जाना पारित किया गया था। इसके बाद नगर निगम 25 साल से लोगों से पानी का दोहरा टैक्स वसूल रहा है। वसूली का आंकड़ा ढाई दशकों में करोड़ों रुपए में पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद निगमायुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
जिनके यहां कनेक्शन नहीं, उनसे भी वसूली
याचिका में उल्लेख है कि शहर में दो से ढाई लाख ऐसे घर हैं, जिन्होंने नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं लिया है, उनसे भी संपत्ति कर के साथ 10 फीसदी जल कर की वसूली की जा रही है। खुद नगर निगम के आंकड़े बता रहे हैं कि शहर में 2 लाख 75 हजार 414 नल कनेक्शन हैं। इनके एवज में हर महीने निगम को करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपए जल कर मिल रहा है। खास बात यह भी है कि नगर निगम कनेक्शन लेने वालों से पूरे 30 दिन का पैसा ले रहा है, जबकि महीने में 10-15 दिन ही पानी आता है। आए दिन लाइन फूटने, जलूद में फॉल्ट होने से भी 2-3 दिन पानी नहीं मिलता है।
मिल क्षेत्र, राजबाड़ा, आड़ा बाजार, जवाहर मार्ग, मल्हारगंज, राजमोहल्ला जैसे कई इलाके जहां नर्मदा का पानी बमुश्किल 30-40 मिनट ही आता है, इसमें भी प्रेशर बहुत कम रहता है। लोगों को अपना कनेक्शन जमीन के अंदर 3-4 फीट नीचे तक करना पड़ गया। रोज सुबह गड्ढए में उतरकर एक-एक बाल्टी पानी भर रहे हैं।