इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गर्मी से पहले ही पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शहर की कृष्ण बाग कॉलोनी (वार्ड क्रमांक 30) में नर्मदा लाइन तो डाली गई है, लेकिन पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। कई गलियों में पानी आता भी है तो वह गंदा और उपयोग के लायक नहीं होता। बावजूद इसके नगर निगम हर महीने बिल भेज रहा है, जिससे रहवासी परेशान हैं।
27-28 हजार रुपये तक पानी का बिल वसूल चुके, सप्लाई न के बराबर
रहवासियों का कहना है कि अब तक उनका 27-28 हजार रुपये तक पानी का बिल हो चुका है और नगर निगम वाले आए दिन पैसा वसूलने आते हैं। लेकिन सप्लाई न के बराबर है। बीते आठ सालों से नर्मदा लाइन डली हुई है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
अधिकारियों ने हैदराबाद और दिल्ली जैसी स्थिति बनने की जताई आशंका
जब रहवासियों ने अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने पानी की किल्लत को लेकर हैदराबाद और दिल्ली जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई। जिससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन इस समस्या के प्रति कितना गंभीर है।
निजी बोरिंग से खरीदना पड़ रहा पानी
उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान पार्षद हाथ जोड़कर वोट मांगने आए थे, लेकिन अब जनता को अपनी समस्या लेकर उनके पास हाथ जोड़ने जाना पड़ रहा है। विधायक से भी कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। हालात ऐसे हैं कि लोगों को निजी बोरिंग से 150 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पानी खरीदना पड़ रहा है।
मीडिया के पहुंचते ही टैंकर वाले की धमकी
नगर निगम का टैंकर आता जरूर है, लेकिन सिर्फ एक मिनट के लिए पानी सप्लाई कर आगे बढ़ जाता है। तो संयोग से टैंकर भी पानी देने के लिए वहां मौजूद था। कैमरा देखते ही टैंकर कर्मी ने रहवासियों को धमकाते हुए कहा-“अब मीडिया वालों से ही पानी भरवा लेना।”
पार्षद के कहने पर सिर्फ एक मिनट दिया जा रहा पानी
इस पर रहवासियों ने टैंकर कर्मी का विरोध किया, जिसके बाद उसने कबूल किया कि पार्षद मनीषा नागौर के आदेश पर ही घरों में सिर्फ एक मिनट के लिए पानी दिया जा रहा है। लेकिन क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इतने समय में चार बर्तन भी नहीं भरते, जिससे पूरे दिन पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। कामकाजी लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है, क्योंकि पानी भरने के इंतजार में उनका पूरा दिन निकल जाता है और वे समय पर काम पर नहीं जा पाते। इससे उनके सामने आर्थिक समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं।