नीमच। जिले की जावद तहसील के नयागांव में स्थित सीमेंट कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की फैक्ट्री के स्क्रेप की आज नीलामी हुई। इस नीलामी में देशभर के कई स्क्रेप डीलरों ने सहभागिता की। हालांकि खबर लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हुआ था कि यह स्क्रेप कितनी राशि में नीलाम हुआ या नीलामी की तारीख को बढ़ाया गया। केंद्र सरकार द्वारा जो नीलामी का आदेश जारी किया गया था, तभी से नीमच जिले की राजनीति भी गरमाई हुई है। कांग्रेस व इंटक के नेताओं ने सीधे तौर पर बीजेपी की मोदी सरकार, सांसद सुधीर गुप्ता व जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा पर उद्योगपतियों से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
कुप्रबंधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी-
कुप्रबंधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण कई वर्षों से सीसीआई फैक्ट्री बंद पड़ी है। अब इसका अस्तित्व भी खत्म होने जा रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने चुपके-चुपके एक बड़ा आदेश भी जारी कर दिया। इस आदेश में फैक्टरी प्लांट एवं मशीनरी के साथ रेलवे ट्रैक, रेलवे इंजन, स्टोर एवं स्पेयर्स का कच्चा माल नीलाम करने का जिक्र है। जिसकी आखिरी तारीख 5 मार्च निर्धारित की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा निकाले गए टेंडर में 44 करोड़ की राशि भी निर्धारित की गई थी, जिस राशि से बोली की शुरूआत हुई। देशभर के कई स्क्रेप डीलरों ने पहले ही फैक्टरी का निरीक्षण भी कर लिया था।
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कांग्रेस 8 मार्च को इंटक के साथ करेगी प्रदर्शन-
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल चौरसिया ने बताया कि सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए नीमच जिले के नयागांव क्षेत्र में सीसीआई की स्थापना की थी। क्षेत्र की तरक्की के लिए स्थापित किए गए इस प्लांट में करीब 3 हजार लोगों को रोजगार मिला था। लेकिन किन्हीं कारणों के चलते यह प्लांट बंद हो गया। जबकि इसी क्षेत्र में स्थापित प्राइवेट प्लांटों ने लगातार तरक्की है। सीसीआई में उत्तम क्वालिटी की सीमेंट का निर्माण होता था। प्राइवेट कंपनियों की मिलीभगत से सरकार ने इसे बंद कर दिया। इसके बाद क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता ने इसको शुरू करवाने में कोई रूचि नहीं दिखाई। वहीं राज्य व केंद्र की सरकार ने भी क्षेत्र की जनता को धोका दिया। अभी बीजेपी की सरकार स्क्रेप की नीलामी कर रही है। आने वाले समय में जमीन भी नीलाम करेगी। कांग्रेस 8 मार्च को इंटक को साथ लेकर प्रदर्शन करेगी।
मोदी सरकार निजीकरण को प्रोत्साहित कर रही-
इंटक नेता भगत वर्मा ने बताया कि सीसीआई का मुद्दा जिला इंटक के माध्यम से 2019 से उठा रहे हैं। यह नयागांव सीमेंट फैक्टरी को बंद करने का यह सिलसिला जब से शुरू हुआ है, तब से इंटक ने मोर्चा खोल रखा है। 1976 में प्लांट चालू हुआ था जो अब नीलाम होने की कगार पर पहुंच गया है, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है। यह एशिया का सबसे बड़ा सीमेंट प्लांट था जो आंज बंद हो चुका है। सीमेंट प्लांट की इस दुर्दशा के पीछे सांसद सुधीर गुप्ता और जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा का बड़ा रोल है। इन्होंने यह मुद्दा उठाया था कि इस प्लांट को हम बंद नहीं होने देंगे। 460 करोड़ में बनी इस फैक्टरी के स्क्रेप चुपके चुपके टेंडर जारी कर नीलाम किया जा रहा है। उक्त प्लांट में बड़े पैमाने पर सीमेंट का उत्पादन होता था। यह देश का सबसे पहला प्लांट था। केंद्र सरकार ने पूरे देश में 11 प्लांट स्थापित किए थे। जिनमें से 8 बंद हो चुके हैं। महज 3 प्लांट ही सीमेंट का उत्पादन कर रहे हैं। मोदी सरकार निजीकरण को प्रोत्साहित कर रही है। इंटक कांग्रेस के साथ मिलकर विरोध करेगी। विधायक व सांसदं का पुतला भी फूंकेंगे।
प्राइवेट कंपिनयों को लाभ पहुंचाने के लिए बंद की-
समाजसेवी और ट्रेड यूनियन के नेता किशोर जेवरिया ने बताया कि जब इंदिरा गांधी की सरकार थी तब निजी क्षेत्रों में सीमेंट का वर्चस्व था। देश में जब विकास हो रहा था तब सीमेंट की बहुत जरूरत थी। इसी को मद्देनजर रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के लिए नयागांव में सीसीआई की स्थापना की गई थी। इस प्लांट से उत्पादन होने वाली सीमेंट उच्च क्वालिटी की थी। जबकि अन्य प्राइवेट कंपनियों की सीमेंट इसके मुकाबले हल्की थी। यहीं कारण है कि प्राइवेट फैक्टरियां सीसीआई को बंद करवाना चाहती थी। बस तभी से इन्होंने सीसीआई में ऐसे अफसरों की नियुक्ति कराई जो धीरे-धीरे इस प्लांट को घाटे की और ले जाए। अधिाकरियों ने कर्मचारियों पर मक्कारी के आरोप भी लगाए। प्लांट में चोरियों की भी कई घटनाएं हुई। सरकार ने पहले इसे बदनाम किया और बाद में बिजली बिल नहीं भरने के नाम पर इसे बंद करवा दिया। सरकार चाहती तो बिजली का बिल भरकर या माफ कराकर इसे बंद होने से रोक सकती थी। सीसीआई के पास जो दूसरे निजी प्लांट है वह भी सीसीआई के सीमेंट बेल्ट पर कब्जा कर रहे हैं।
भारत देश बर्बादी की कगार पर पहुंच गया-
नीमच जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष मनोहर अंब ने बताया कि नयागांव में जब सीसीआई की स्थापना हुई थी तब जिले व आसपास के जिले के हजारों युवाओं को रोजगार मिला था। इस प्लांट में उच्च स्तर की सीमेंट का उत्पादन होता था। लेकिन क्या वजह रही कि क्षेत्र में एक निजी प्लांट भी खोला गया। इसी निजी प्लांट को फायदा पहुंचाने के लिए ही सीसीआई को बंद किया गया है। यहां जब भी चुनाव आते हैं जनप्रतिनिधि इसे चुनावी मुद्दा बनाते हैं और चुनाव निपटने के बाद भूल जाते है। सीसीआई फैक्टरी एशिया की जानी मानी फैक्टरी थी। सरकार ने 11 में से 8 प्लांट बंद कर दिए हैं। बीजेपी के मोदी सरकारी उपक्रमों को बेच रहे हैं। नीलामी की प्रक्रिया को भी भ्रष्टाचार के लिए ऑनलाइन रखा गया। हमारा देश आज बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। देश पर 181 लाख करोड़ का कर्जा हो गया है। जब मनमोहन सिंह पीएम थे जब 52 लाख करोड़ का कर्जा था। मोदी जब से आए हैं कर्जा बढ़ा दिया है। हम तो चाहते हैं कि इस प्लांट को पुनः चालू किया जाए, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके।
सगराना में लगने वाले प्लांट को फायदा पहुंचाने का प्रयास-
कांग्रेस नेत्री मधु बंसल ने बताया कि जब से भाजपा शासन में आई है तब से ही पीएम मोदी ने सरकारी उपक्रमों को बेचने का एक खेल खेलना शुरू कर दिया है। देश के बडे एयरपोर्ट, कारखाने, बिजली कंपनी हो या रेलवे सभी को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। सुनियोजित ढंग से बीजेपी की सरकार इस काम को अंजाम दे रही है। कई बड़े उद्योगपतियों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाया जा रहा है। क्योंकि बीजेपी इन्हीं बड़े उद्योगपतियों के चंदे पर चुनाव लड़ती है और हिंदू-मुस्लिम कर सत्ता में आती है। नयागांव के सीसीआई प्लांट की नीलामी भी सुनियोजित ढंग से ही की जर रही है। जबकि भाजपा के जनप्रतिनिधि इसी प्लांट को शुरू करने का वादा करके हमेशा सत्ता में आते हैं। क्षेत्रीय सांसद और जावद विधायक ने इसे शुरू करने को लेकर कभी कोई रूचि नहीं दिखाई। कांग्रेस इस नीलामी का विरोध करती है। आगामी समय में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जाएंगे। नीमच जिले के ग्राम सगराना में 700 बीघा जमीन प्राइवेट कंपनी को दी गई है। उक्त जमीन पर भी सीमेंट प्लांट लगने जा रहा है। उसी को लाभ पहुंचाने के लिए यह खेल खेला गया है। सगराना में लगने जा रहा प्लांट भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता के पुत्र का है।
भंगार को नीलाम करने का निर्णय सही-
चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जिनेंद्र डोसी ने बताया कि फैक्टरी तो लगभग 20 25 साल से बंद पड़ी है। निश्चित रूप से इसके स्क्रेप भी भंगार हो गए हैं। सरकार ने इस स्क्रेप को नीलाम करने का जो निर्णय लिया है वह सही है। क्या इस स्क्रेप से फैक्टरी चालू हो सकती थी। उस भंगार पर तो काम नहीं हो सकता। हम भी चाहते है कि फैक्टरी चालू होनी चाहिए और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलना चाहिए। इस सीमेंट फैक्टरी को चालू करने के लिए इस प्रक्रिया में हमे कैसे आगे बढ़ना चाहिए। इसके बारे में सोचना चाहिए।
विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए। सारी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। 44 करोड़ से बोली की शुरूआत का जिक्र है, लेकिन 300 से 400 करोड़ रूपये का भंगार है। जहां भी मुझे मौका मिला मैंने आवाज उठाई है। सीसीआई के पास बेहतर लाइम स्टोन है। सांसद को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। उनकी दूरदर्शी सोच का फायदा हमेशा क्षेत्र को मिलता आया है।