उज्जैन। देश में सबसे पहले ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के आंगन में होली का पर्व मनाया जाएगा। 13 मार्च को सांध्य आरती में भगवान महाकालेश्वर को गुलाल अर्पित किया जाएगा। उसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने परिसर में होलिका पूजन और सांध्य आरती के बाद होलिका दहन किया जाएगा।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य रामजी पुजारी, प्रदीप गुरु व विजय पुजारी ने बताया कि ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर में पारंपरिक रूप से सबसे पहले होली मनाई जाएगी। इस वर्ष 13 मार्च को महाकालेश्वर की सांध्य आरती में पुजारी सांकेतिक रूप से गुलाल अर्पित करेंगे। इसी दिन पुजारी परिवार की ओर से ओंकारेश्वर मंदिर के सामने परिसर में कंडों की होलिका सजाई जाएगी। साथ ही बड़ी रंगोली भी बनाएंगे। महाकालेश्वर की सांध्य आरती के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं पूजन करेंगी। इसके बाद होलिका दहन किया जाएगा। परिसर में आने वाले प्रत्येक भक्त की द्वार पर ही जांच की जाएगी, ताकि वे किसी भी प्रकार का रासायनिक रंग लेकर न आएं। 25 मार्च 2024 को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भस्मआरती के दौरान गर्भगृह में आग लग गई थी। इस घटना में पुजारी, पुरोहित और सेवक समेत करीब 14 लोग झुलस गए थे।
इलाज के दौरान एक सेवक सत्यनारायण सोनी का निधन हो गया था। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। जांच समिति ने जांच करने के दौरान पाया कि मंदिर के प्रोटोकॉल और होली के नियमों का उल्लंघन हुआ था। उसके बाद मंदिर में आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, फायर सिस्टम लगाया गया है। महाकालेश्वर की 14 मार्च को तड़के होने वाली भस्मआरती में पुजारियों की ओर से महाकालेश्वर को हर्बल गुलाल, अबीर अर्पित किया जाएगा। साथ ही गेहूं की बालियां (ऊंबी) चढ़ाई जाएंगी। रामजी पुजारी के अनुसार होलिका दहन में गेहूं की बालियां अर्पित की जाएंगी। साथ ही भस्मआरती में भी महाकालेश्वर को बतौर नई फसल गेहूं की बालियां अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।