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March 6, 2025, 2:47 pm
KHABAR : सूचना आयुक्त पर जबलपुर हाईकोर्ट ने ठोका 40 हजार जुर्माना, कहा- सरकारी एजेंट की तरह काम ना करे, 2 लाख की जानकारी मुफ्त देने के आदेश, पढे़ खबर

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जबलपुर। मध्यप्रदेश सूचना आयुक्त ने एक सूचना अधिकारी के विषय में मांगी गई जानकारी को बिना जांच के ही अपीलकर्ता की अपील खारिज कर दी। शिकायतकर्ता ने सूचना आयुक्त के द्वारा खारिज की गई अपील को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसपर गुरुवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट में सुनवाई हुई।


कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त पर 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिए है कि अपीलकर्ता को अब 2 लाख 38 हजार रुपए की वह जानकारी मुफ्त में दी जाए, जिसके लिए उनसे राशि की मांग की गई थी। बता दे कि भोपाल के एक फिल्म मेकर नीरज निगम ने 2019 में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी, जिसे कि 30 दिन बाद भी नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने सूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर की थी।


2019 में मांगी थी जानकारी
हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने दिनेश उपाध्याय ने बताया कि फिल्म मेकर नीरज निगम ने 26 मार्च 2019 को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन 30 दिन के अंदर भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। सूचना अधिकारी ने जानकारी के एवज में 30 दिन बाद एक पत्र अपीलकर्ता को यह कहते हुए भेजा कि अब जानकारी चाहिए तो उसके लिए 2 लाख 38 हजार रुपए की राशि जमा करनी होगी। वकील दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को यह भी बताया कि आवेदक ने मुख्य सूचना आयुक्त को आवेदन देकर बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को संबंधित अधिकारी ने 30 दिन के भीतर नहीं दिया, उल्टा 2 लाख 38 हजार रुपए की राशि जमा करने को कहा गया है।


हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना आयुक्त सरकार के एजेंट के रूप में काम न करे। जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट ने सूचना आयुक्त के आदेश को रद्द करते हुए उन पर 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है, साथ ही निर्देश दिए है कि अपीलकर्ता को 2 लाख 38 हजार रुपए की जानकारी फ्री ऑफ कॉस्ट दी जाए। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकल पीठ के समक्ष अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया कि सूचना आयुक्त ने डिस्पैच रजिस्टर एवं पोस्टल डिपार्टमेंट के प्रमाण पत्र के बावजूद भी मांगी गई जानकारी 30 दिन के अंदर नहीं दी थी, इससे यह सिद्ध होता है कि अपीलकर्ता को परेशान करने के लिए झूठे आधारों पर अपील खारिज की गई है।


हाईकोर्ट ने तमाम दस्तावेजों को देखने के बाद यह पाया की जानकारी 30 दिन के अंदर नहीं दी गई है, तथा सूचना आयुक्त ने सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करते हुए अपने विवेक प्रयोग किए बगैर अपील खारिज की है, इसलिए उनके आदेश निरस्त किया जाता है, तथा निर्देश दिए जाते हैं कि आवेदक को 2 लाख 38 हजार रुपए की जानकारी फ्री ऑफ कॉस्ट उपलब्ध कराई जाए, इसके साथ ही गलत आदेश पारित करने के लिए 40000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है जो आवेदक को दिया जाएगा।

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