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March 7, 2025, 3:05 pm
NEWS : जब हर महिला सशक्त होगी, तभी समाज भी सशक्त बनेगा, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समाजसेविका एवं चित्तौड़ अर्बन बैंक की एमडी वंदना वजीरानी के विचार, पढे़ रेखा खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। समाजसेविका एवं चित्तौड़ अर्बन बैंक की एमडी वंदना वजीरानी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कहा कि आज के दौर में महिला दिवस सिर्फ "महिलाओं के सम्मान" तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लैंगिक समानता, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय का प्रतीक बन गया है।


आर्थिक स्वतंत्रता और उद्यमिता के बारे में उन्होंने कहा महिला उद्यमिता की वृद्धि: भारत में 60 लाख से अधिक महिला उद्यमी हैं, लेकिन वे अभी भी कुल MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) का सिर्फ 20% ही संभालती हैं। फिनटेक और डिजिटल बैंकिंग में भागीदारी: डिजिटल इंडिया पहल के तहत महिलाओं की वित्तीय समावेशन दर 77% तक बढ़ी है।


(ii) राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण
50% पंचायतों में महिलाओं का नेतृत्व: भारत में स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण मिलने से उनकी भूमिका बढ़ी है। "महिला आरक्षण बिल" (2023): पर वंदना जी कहते हैं कि इस बिल के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की गई हैं। वजीरानी ने कहा कि महिला दिवस पर आत्मनिर्भरता और समानता की बात करना तो आम हो गया है, लेकिन महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर कम ही ध्यान दिया जाता है। भारतीय महिलाओं में 42% तक डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले बढ़े हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखना एक चुनौती है, विशेष रूप से वर्किंग मदर्स के लिए। उन्होंने भारत की अनसुनी महिला नायक जिनके बारे में कम लोग जानते हैं इतिहास की किताबों में कुछ ही महिलाओं का नाम लिया जाता है, लेकिन असल में कई अनकही कहानियाँ भी हैं— इनके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा नागालैंड की "आयरन लेडी" – नान्गांगोशी 


उन्होंने 1950-60 के दशक में नागालैंड में महिलाओं की शिक्षा के लिए आंदोलन चलाया।
नागा समाज में महिलाओं को समान अधिकार दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। दक्षिण भारत की पहली महिला इंजीनियर – ए. लक्ष्मीबाई 1940 के दशक में जब महिलाओं को इंजीनियरिंग में जगह नहीं मिलती थी, तब उन्होंने बैंगलोर में पहली महिला इंजीनियर बनने का गौरव प्राप्त किया। डॉ. तान्या खन्ना – अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान इसरो की वैज्ञानिक, जिन्होंने 2023 में भारत के पहले "गगनयान" मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


वजीरानी ने महिला दिवस को सार्थक बनाने के बारे में कहा कि केवल 8 मार्च को महिलाओं का सम्मान करने से कुछ नहीं बदलेगा। असली बदलाव तब आएगा जब हर दिन महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलेगा।


(i) शिक्षा और करियर में समान अवसर
STEM, AI, और डिजिटल लर्निंग में लड़कियों की भागीदारी को बढ़ावा देना। महिलाओं के लिए फ्री स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाना।


(ii) कानूनी अधिकारों की जानकारी
घरेलू हिंसा अधिनियम (2005), कार्यस्थल पर यौन शोषण अधिनियम (2013) जैसी नीतियों के बारे में जागरूकता फैलाना।


(iii) पुरुषों की भागीदारी
महिला समानता की बात सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पुरुषों को भी इसमें भाग लेना होगा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक सतत आंदोलन है। यह महिलाओं के संघर्ष, सफलता और सपनों का प्रतीक है। आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि सिर्फ "महिला दिवस" तक सीमित न रहकर, इसे "महिला युग" में बदलें, जहाँ हर महिला को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिले। "जब हर महिला सशक्त होगी, तभी समाज भी सशक्त बनेगा।"

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