शाजापुर। जिले के कालापीपल विकासखण्ड के ग्राम जाबड़िया भील की निवासी 25 वर्षीय निकिता परमार की कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने हौसले से कठिनाईयों को पार कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। निकिता परमार ब्यूटी पार्लर, आटा चक्की और कृषि सखी जैसे कार्यों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
निकिता परमार समूह से जुड़ने के पहले की स्थिति के बारे में बताते हुए कहती हैं कि समूह से जुडने के पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब थी। साथ ही उनके पति की भी कोई आय नहीं थी। जिससे घर में रोजमर्रा के खर्च पूरे करना भी मुश्किल हो रहा था। जिस कारण उनके बीच में आपसी तनाव होने लगा और उनका तलाक का मुकदमा चलने लगा। वे बताती हैं कि उनके गाँव में ऐसा माहौल था की महिलाओ को घर एवं गाँव से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। जिस कारण उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब होने लगी और वे इस वजह से ससुराल छोड़कर मायके में रहने लगी।
समूह में कैसे जुड़ी-
निकिता परमार ने समूह से जुडने के बारे में बताया कि एक दिन उनके गाँव के सरकारी स्कूल में ग्रामीण आजीविका मिशन कालापीपल के अधिकारी एक समूह की बैठक कर रहे थे, जिस बैठक में वे भी शामिल हुई एवं उन्होंने महिलाओ की बातों को सुना और अधिकारियो से स्व सहायता समूह के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्हें समूह बनाने की प्रेरणा मिली। उन्होंने अपना “महिला विकास आजीविका स्व. सहायता समूह” का गठन किया।
सफलता की ओर कदम--
समूह से जुड़ने के बाद निकिता ने अपनी साप्ताहिक बचत करना प्रारम्भ किया और बैंक में जा कर जमा किया। उसके बाद उन्हें हमारे समूह की बचत राशि में से 3000 रुपए प्राप्त हुए, जिससे सिलाई कार्य प्रारंभ किया। लेकिन उस कार्य से भी उनकी आय में कोई ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। इसके उपरांत उनके समूह को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से बैंक की तरफ से 150000 रुपए का लोन प्राप्त हुआ, जिसमें से निकिता को 25000 रूपये की राशि प्राप्त हुई। उस राशि से उन्होंने अपनी आटा चक्की की दुकान शुरू की। आटा चक्की की दुकान से उनकी आय में थोड़ी बढ़ोतरी होने लगी। उस ऋण की राशि को समय से जमा करने के बाद उन्हें पुनः समूह से 35000 रूपये की राशि प्राप्त हुई, जिसका इस्तेमाल उन्होंने कर ब्यूटी पार्लर का कार्य प्रारंभ कर किया। इसके साथ ही वे कृषि सखी का प्रशिक्षण लेकर कृषि सखी का कार्य भी कर रही हैं। उनके कार्य एवं आटा चक्की की दुकान के अच्छे चलने से उन्हें 14 से 15 हज़ार रूपए की मासिक आय प्राप्त होने लगी हैं।
समूह से जुड़ने के बाद सामाजिक जीवन में आया बदलाव-
समुह से जुड़ने के बाद निकिता के जीवन में काफी बदलाव हुए। पहले उन्हें एक-एक रूपये सोच समझ कर खर्च करने पड़ते थे। वे पड़ी लिखी तो थी ही पर उन्हें सही दिशा नहीं मिल पा रही थी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा पड़ी लिखी काम करने की इच्छुक महिलाओं के लिए रोजगार एवं आत्म सम्मान दिलाने के प्रयास किये जा रहे है, जिसका लाभ उठाते हुए आज उन्होंने समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई हैं। आज उनके साथ आस-पास की अनेक दीदियां भी उनके साथ जुड़ रही हैं। निकिता कहती हैं कि आज उनके परिवार को उन पर गर्व हैं। इन सभी सहयोगों के लिए वे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को धन्यवाद देती हैं।