उज्जैन। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा दूधतलाई में सोमवार को सिख गुरुओं की पवित्र निशानियों का स्वागत किया गया। शहर में पहली बार सिख संगत को इन पवित्र निशानियों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
गुरुद्वारा के अध्यक्ष इकबाल सिंह गांधी ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए एकत्रित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत संगत द्वारा कीर्तन से हुई। गांधी ने एक रोचक तथ्य साझा किया कि गुरु गोविंद सिंह ने आनंदपुर में उज्जैन के दो सिखों को कड़ा प्रदान किया था, जिनमें से एक का नाम विशुंभर दास था।
पंजाब से पधारे गुरमत प्रचारक डॉ. भगवान सिंह खोजी ने बताया कि इन 13 पवित्र निशानियों में गुरु का खंजर, कृपाण, करमंडल साहिब, डाल, स्वर्ण स्याही से लिखी पुस्तक, हुकुम नामा, जग माता गंगा जी और पीड़ा माता दामोदर शामिल हैं। ये निशानियां इंदौर से होते हुए उज्जैन पहुंची हैं।
देश की रक्षा में दिए बलिदान की याद में कार्यक्रम
डॉ. खोजी ने बताया कि इन निशानियों को प्रदर्शित करने का मुख्य उद्देश्य गुरु तेग बहादुर के साढ़े तीन सौ साल पूरे होने के अवसर पर उनकी याद को ताजा करना है। उन्होंने हिंदुस्तान की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। उनकी कुर्बानी को याद करते हुए उनकी पवित्र निशानियों के दर्शन कराए जा रहे हैं।