इंदौर। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली। उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों-विद्यार्थियों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने और समयबद्ध रणनीति तैयार कर अगले 6 माह में सकारात्मक बदलाव एवं परिणाम लाने को कहा। साथ ही वादा किया कि इंदौर को सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के क्षेत्र में अव्वल बनाने में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा संबंधी समिति पूरा सहयोग देगी।
सप्रे ने कहा कि स्वच्छता के बाद इंदौर को सड़क सुरक्षा एवं यातायात सुधार के क्षेत्र में भी देश में अव्वल बनाया जाए। इंदौर में वह सभी क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को पूरी गंभीरता, लगन एवं समर्पण भाव से इस कार्य में जुटने को कहा। वे कहते हैं कि इंदौर को अव्वल बनाने के लिए सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पालन कराना जरूरी है।
उन्होंने इंदौर जिले में पिछले 5 साल में हुई सड़क दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट के चिन्हांकन एवं उनके सुधार कार्य, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन तथा चालानी कार्रवाई के संबंध में किए जा रहे कार्यों और नवाचारों, जन जागरूकता अभियान आदि की जानकारी ली। बैठक के बाद सप्रे ने इंदौर में बायपास व अन्य जगहों पर चिह्नित ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण भी किया। बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव, नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
हेलमेट और सीट बेल्ट को बढ़ावा देना जरूरी
पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि इंदौर में हेलमेट पहनने की आदत बढ़ाएं। सीट बेल्ट लगाने के संबंध में जागरूकता लाएं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों व यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करें। लोक परिवहन वाहन बढ़ाएं, ताकि सड़कों पर चलने वाले छोटे वाहनों की संख्या में कमी आए। पुलिस सहित सभी सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना तत्काल रूप से अनिवार्य करें।
किसी की भी गलती से किसी निर्दाेष की जान नहीं जाए
न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा कि इंदौर जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ संकल्पबद्ध होकर कार्य करें। सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या में कमी लाई जाए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जान महत्वपूर्ण है। यह प्रयास हो कि किसी की भी गलती से किसी निर्दाेष की जान नहीं जाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संस्थाएं अपने कर्मचारियों को संस्था में आने-जाने के लिए बड़ी बसों या अन्य यात्री वाहन उपलब्ध कराएं।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को बचपन से ही सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूक करें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वाहनों की फिटनेस की निरंतर चेकिंग की जाए। ड्राइविंग टेस्ट में भी सख्ती बरतें। वाहनों का बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाए। वाहनों की ओव्हरलोडिंग को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।