मुरैना। लगातार हो रही तेज बारिश, राजस्थान के डैमों से छोड़े गए पानी और पार्वती, सीप जैसी नदियों के पानी के कारण चंबल नदी रौद्र रूप में आ गई है। चंबल नदी के राजघाट पर खतरे का निशान 138 मीटर हैं, बुधवार की शाम पांच बजे यहां जलस्तर 142 मीटर तक पहुंच गया। वहीं अंबाह के उसैद घाट पर चंबल नदी का खतरे का निशान पांच मीटर नींचे डूब गया है। दो दिन से चंबल नदी उफन रही है और तभी से प्रशासन की टीमें गांव-गांव में मुनादी करवा रही हैं। इसके बाद भी कईयों गांवों के लोग चंबल की डूब में आने वाले इलाकों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचे। बुधवार की सुबह चंबल की बाढ़ से अंबाह तहसील के बीलपुर के मझरा घेर, मल्हन का पुरा, कंचन का पुरा, छैकुरियन का पुरा और कुथियाना ग्राम पंचायत के रामप्रकाश का पुरा को खाली करवाया गया। इन पांचों गांवों के 119 परिवारों के 310 सदस्यों को मोटरवोटों से निकालक सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दर्जनों परिवार पहले ही गांव खाली कर रिश्तेदारों के यहां पहुंच गए हैं। उधर सबलगढ़ तहसील का रायडी-रायधेन गांव चंबल की बाढ़ से घिर गया, यहां से गर्भवती महिलाओं सहित 15 लोगों का रेस्क्यूू किया गया। देवगढ़ क्षेत्र का गया का पुरा डूब में आ गया, बरवासिन गांव की कुछ बस्ती डूब में आ गई। इन गांवों में भी एसडीईआरएफ की टीमों को रेस्क्यू करना पड़ा। चिन्नौनी क्षेत्र के भी तीन गांव चंबल नदी की बाढ़ में घिर गए हैं, वहां भी देर शाम तक आपदा प्रबंधन की टीमें रेस्क्यू में जुटी रहीं। जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ की चपेट में आए 91 गांव के लोगों के लिए प्रशासन ने 64 राहत शिविर बनाए हैं, इनमें से तीन राहत शिविर बुधवार से शुरू कर दिए गए। कलेक्टर अंकित अस्थाना बुधवार को दिनभर चंबल किनारों के गांवों में हालात जानते रहे, उन्होंने बाढ़ प्रभावित कई गांवों का दौरा किया।
वही देवगढ़ थाना प्रभारी अरुण सिंह कुशवाह ने बरवासिन, गयापुरा गांव के कुछ लोग फंसे हुए थे, उन्हें खाण्डौली की ओर निकाला गया है। एसडीईआरएफ के साथ मिलकर बाढ़ में फंसे हुए लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है। कई लोग खुद ही मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। लगातार मुनादी करवा रहे हैं, कि रात में जलस्तर और बढ़ सकता है। जिन गांवों के आसपास तक पानी पहुंचा है, वहां भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा जा रहा है। और वहीएसडीईआरएफ के जिला कमांडेंट सौरभ त्रिपाठी ने बताया, टेंटरा, अंबाह, देवगढ़ और चिन्नौनी थाने में टीमें लगाई गई है। चिन्नौनी में पानी से फंसे लोगों ने मोटरवोट में बैठने से इंकार कर दिया। टेंटरा क्षेत्र में 15 लोगों का रेस्क्यू किया है। देवगढ़ क्षेत्र में भी 15 लोगों का रेस्क्यू किया गया है। अंबाह थाने में एक टीम रिजर्व है, कहीं जरूरत पड़ने पर उसका प्रयोग किया जा सकता है। और वहीगया का पुरा निवासी रामअख्त्यार ने बताया कि चंबल नदी में बाढ़ से पूरा गांव घिर गया है। घरों में पानी भर जाता है। कच्चे घर गिर जाते हैं, इसलिए पूरा गांव को लोग खाली करके सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। गया का पुरा के ग्रामीण सेवाराम ने बताया कि हर साल चंबल नदी का जलस्तर बढ़ता है, फसलें खराब हो जाती हैं। इस बार खतरे के निशान से ऊपर आ गई है। घरों में पानी भर गया है। मिट्टी के घर गिर जाते हैं। घर में जो जरूरत का सामान है उसे लेकर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। प्रशासन की टीमें आई हैं, वह नींचे के गांवों से लोगों को निकाल रहे हैं।