नीमच। मध्य प्रदेश में राजस्व अधिकारियों ने एक बार फिर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा राजस्व अधिकारियों को न्यायिक और गैर-न्यायिक दो अलग-अलग वर्गों में विभाजित करने की योजना के खिलाफ है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक यह योजना पूरी तरह से वापस नहीं ली जाती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे। नीमच में भी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े राजस्व अधिकारी अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे हैं।
बताते चलें कि संवर्ग के न्यायिक और गैर न्यायिक विभाजन योजना का पहले भी विरोध हुआ था, लेकिन सरकार के मौखिक आश्वासन के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। आश्वासन में कहा गया था कि योजना सिर्फ 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू होगी, राजस्व न्यायालयों का विलय नहीं होगा और गैर-न्यायिक अधिकारियों को जरूरी संसाधन दिए जाएंगे।
अधिकारियों का आरोप है कि सरकार ने अपने वादों का पालन नहीं किया। योजना को 9 और जिलों में लागू किया गया, राजस्व न्यायालयों का विलय हुआ और अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन भी नहीं दिए गए। अब राजस्व अधिकारियों ने 6 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन विरोध शुरू कर दिया है। इन्होंने अब आपदा प्रबंधन को छोड़कर सभी सरकारी कार्यों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। अधिकारी जिला मुख्यालयों में मौजूद रहेंगे, लेकिन काम नहीं करेंगे। राजस्व अधिकारी अब अपने सरकारी वाहन और डिजिटल सिग्नेचर डोंगल जमा कर देंगे और आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ देंगे।
अधिकारियों ने मांग की है कि कार्यपालिक दंडाधिकारी की शक्तियाँ पुलिस या किसी अन्य विभाग को सौंप दी जाएँ और विभाजनकारी योजना को रद्द किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि वे सौहार्दपूर्ण प्रशासनिक वातावरण चाहते हैं और सरकार से उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान देने का आग्रह करते हैं।