उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय के ललित कला सहित अन्य विभागों के विद्यार्थी इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत है कि मिट्टी में तुलसी के बीज और महाकाल मंदिर से निकलने वाले फूलों के सूखे बीज मिलाए गए हैं।
विद्यार्थियों का उद्देश्य है कि घर पर प्रतिमा विसर्जन के बाद गमले में तुलसी और फूलों के पौधे उग आएं। ललित कला विभाग के छात्र पंकज सेहरा ने बताया कि प्रतिमाओं के लिए नैचुरल इको फ्रेंडली पीली मिट्टी तैयार की गई है। इसमें महाकाल मंदिर के फूल, प्रयागराज की मिट्टी और जल का भी उपयोग किया गया है।
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पार्थिव प्रतिमा की स्थापना इस साल 27 अगस्त को होगी। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन स्थित गणेश हॉल में विद्यार्थी इन प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं। अब तक करीब 100 प्रतिमाओं के लिए ऑर्डर मिल चुके हैं।
बीएससी कम्प्युटर के छात्र राज भार्गव ने बताया कि प्रतिमाओं पर गैरू और आर्गेनिक कलर का उपयोग किया जा रहा है। उनका मानना है कि यह पहल युवाओं के लिए एक नया स्टार्टअप बन सकती है और अन्य लोगों को रोजगार दे सकती है।
विश्वविद्यालय में पांच इंच से लेकर दो फीट तक की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। विद्यार्थियों का प्रयास है कि बाहर के अधिकारियों को भी इको फ्रेंडली प्रतिमा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
नए बच्चों को भी दे रहे प्रशिक्षण
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासनिक भवन में गणेश प्रतिमा बनाने के लिए स्थान उपलब्ध कराया। यहां प्रतिमाओं को आकार देने के साथ ही प्रशिक्षण लेने वाले अन्य विद्यार्थी व लोगों को प्रशिक्षित भी इन्ही विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है। सात दिवसीय प्रशिक्षण के लिए विद्यार्थियों के साथ बड़ी उम्र के लोगों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया है।