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August 6, 2025, 5:04 pm
KHABAR : लड़कियों के पहनावे को लेकर गणेश मंदिर में लगाया बोर्ड, बेटियों को टाइट और छोटे कपड़े पहनाने वाले परिवारों पर खड़े किए सवाल, माता-पिता को बताया जिम्मेदार, पढे़ खबर 

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उज्जैन। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य और प्रेमानंद महाराज द्वारा लड़कियों को लेकर की गई टिप्पणी के बाद उपजे विवाद की गूंज अब मंदिर परिसरों तक पहुंच गई है। उज्जैन से करीब 55 किलोमीटर दूर नागदा के बिड़ला ग्राम स्थित बड़े गणेश मंदिर में एक पोस्टर चस्पा किया गया है, जिसमें लड़कियों के पहनावे को लेकर पांच सवाल पूछे गए हैं। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसका समर्थन किया है।


यह पोस्टर किसने और कब लगाया, इस बारे में मंदिर समिति या स्थानीय प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है, लेकिन इसने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पोस्टर में माता-पिता को लक्षित करते हुए कहा गया है कि लड़कियों के अमर्यादित पहनावे के लिए मां जिम्मेदार है, जबकि पिता की मौन स्वीकृति को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। इसके साथ ही अर्धनग्न कपड़े पहनने वाली लड़कियों को ष्मॉडर्न, स्मार्ट, स्टैंडर्ड और आधुनिकष् मानने वाली सोच पर तंज कसा गया है।


पोस्टर में अंत में जनजागरण समिति का उल्लेख किया गया है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह किसी सामाजिक संगठन की पहल हो सकती है। हालांकि, अब तक किसी संस्था ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।


पुजारी महासंघ ने किया समर्थन
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने मंदिर परिसर में लगे पोस्टर का समर्थन किया है। महासंघ के अध्यक्ष और महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा का कहना है कि मंदिर एक आस्था और मर्यादा का स्थान है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं, विशेषकर युवतियों को शालीनता का ध्यान रखना चाहिए खासकर मंदिर में प्रवेश करते समय। दक्षिण के मंदिरों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और महाकाल मंदिर के गर्भगृह में भी ड्रेस कोड लागू है। ऐसे में मंदिर आने वाली महिलाएं, युवतियां और पुरुष भी शालीन कपडे़ में आएंगे तो सनातन धर्म का मान सम्मान कायम रह सकेगा।


बढ़ रही है सामाजिक प्रतिक्रिया
पोस्टर सामने आने के बाद सोशल मीडिया और समाज में इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक वर्ग इसे महिलाओं की आजादी और व्यक्तिगत पसंद पर हमला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे सांस्कृतिक मर्यादा और भारतीय परंपराओं के संरक्षण की दिशा में उठाया गया कदम मान रहा है।


मंदिर समिति और प्रशासन मौन
विवाद बढ़ने के बावजूद अब तक स्थानीय प्रशासन या मंदिर समिति की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पोस्टर को लेकर अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इसे हटाया जाएगा या इसे लेकर कोई कार्रवाई की जाएगी।

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