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August 8, 2025, 1:29 pm
NEWS : राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उदयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत विद्यतजन सम्मान समारोह में 56 विद्वानों का किया सम्मान, बोले- संस्कृत भाषा ही नहीं, भारत की आत्मा, ज्ञान की गंगा और सनातनी चेतना की संवाहक, पढ़े रेखा खाबिया की खबर

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चित्तौड़गढ़। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गुरुवार को उदयपुर में संस्कृत शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार की ओर से नगर निगम उदयपुर के सुखाड़िया रंगमंच सभागार पर आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत विद्यतजन सम्मान समारोह में 56 विद्वानों का सम्मान किया। समारोह में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी उपस्थित थे। समारोह में माकड़ादेव आश्रम झाडोल के संत गुलाबदास का भी सान्निध्य मिला। समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुभकामना संदेश वाचन भी किया गया । संस्कृत शिक्षा संभागीय कार्यालय के उपनिरीक्षक राममोहन शर्मा ने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। समारोह में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, संभागीय आयुक्त प्रजा केवलरमानी भी बतौर विशिष्ट अतिथि मंचासीन रही।

विद्वतजनों का किया सम्मान-
समारोह में कुल चार वर्गों में 56 सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। इस वर्ष संस्कृत साधना शिखर सम्मान चित्तौड़गढ़ के कैलाश चंद्र मूंदड़ा को प्रदान किया गया। इसमें एक लाख रूपए की सम्मान राशि प्रदान की गई। दो व्यक्तियों को संस्कृत साधना सम्मान, सात संस्कृत विद्वत्सम्मान पुरस्कार, ।। संस्कृत युवा प्रतिभा पुरस्कार सहित मंत्रालयिक सेवा सम्मान तथा विभिन्न अकादमिक स्तर के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

वेद वि‌द्यालय के लोगो व विभागीय पत्रिका का विमोचन- 
समारोह में विधानसभा अध्यक्ष देवनानी, शिक्षा मंत्री दिलावर सहित अन्य अतिथियों ने उदयपुर में प्रस्तावित राजकीय आदर्श वेद विद्यालय के लोगो का अनावरण किया। साथ ही संस्कृत शिक्षा विभाग की वार्षिक पुस्तिका श्रावणी का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में बाल वाटिका पुस्तकों तथा संस्कृत शिक्षा विभाग की एसएससीआईटी के पंचांग का भी विमोचन किया गया।
समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए देवनानी ने कहा कि संस्कृत विश्व की सभी भाषाओं की जननी है। यह मनुष्य के व्यक्तित्व को भीतर से निखारती और पल्लवित करती है। इसमें ऋषियों की अनुभूति और वेदों की वाणी निहित है। हमारी संस्कृति और संस्कारों को बचाना है तो संस्कृत को बचाना अति आवश्यक है। इस बात का संतोष है कि केंद्र और राज्य सरकारें संस्कृत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। राजस्थान संस्कृत निदेशालय स्थापित करने वाला देश का प्रथम राज्य है। इससे संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन को बल मिल रहा है। 
देवनानी ने कहा कि संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, वरन् भारत की आत्मा, ज्ञान की गंगा और सनातनी चेतना की संवाहक भी है। संस्कृति और संस्कारों का संरक्षण केवल संस्कृत से ही हो सकता है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः विश्वगुरु बनाने का परिकल्पना के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की क्षमता और सामर्थ्य संस्कृत में निहित है। संस्कृत सिर्फ वेदवाणी ही नहीं, विज्ञान वाणी भी है। यह केवल शास्त्रों की ही भाषा नहीं, एआई की भाषा भी है, अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा भी है। यह सिद्ध हो चुका है कि संस्कृत कम्प्यूटर विज्ञान की श्रेष्ठ भाषा है। सभी विषयों का प्रारंभिक और मूल ज्ञान संस्कृत भाषा में ही उपलब्ध है। दुनिया में जितने भी आविष्कार हुए है, उनका मूल भारतीय वेदों में है, जो संस्कृत में लिखित हैं। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार संस्कृत के संवर्धन के लिए कार्य कर रही हैं।
देवनानी ने विश्वविद्यालयों का आह्वान करते हुए कहा कि समय के साथ संस्कृत समझने वालों की कमी हुई है। यहां तक की पूजा पाठ, कर्मकाण्ड करने वाले भी नहीं मिलते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को ज्योतिष, कर्मकाण्ड जैसे विषयों पर छः माह अथवा 9 माह के पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए, ताकि युवा अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ें। उन्होंने कहा कि संस्कृत में केरियर की भी अपार संभावनाएं हैं। देवनानी ने समारोह में सम्मानित होने वाले विद्वतजनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी संस्कृत के प्रति साधना और समर्पण का है। इनसे प्रेरित होकर अन्य लोग भी संस्कृत की सेवा में आगे आएंगे।

संस्कृत में छिपा है अथाह ज्ञान-
समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि संस्कृत का गहन अध्ययन करें, संस्कृत में जान का अथाह भंडार छिपा हुआ है। महाभारत में संजय आंखों देखा हाल बताते थे यह सब संस्कृत के माध्यम से मंत्रों की तकनीक से संभव था।
शिक्षा मंत्री ने स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुएं प्रायः विदेशी ब्रांड की होती है, हमें इस आदत को छोड़कर स्वदेशी की अपनाना होगा। स्वदेशी अपनाने से ही देश मजबूत होगा। 
दिलावर में कहा कि आज भारत में हर वस्तु का निर्माण ही रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे देश के हथियारों में दुनिया के बड़े से बड़े हथियार मार गिराए। अमेरिका ने जब सुपर कंप्यूटर देना बंद कर दिया था तो हमने स्वयं का सुपर कंप्यूटर बना दिया। इसीलिए हमारी क्षमताओं को कम नहीं आंके, विदेशी कंपनियों का सामान खरीदकर हम जाने अनजाने दुश्मन देश को समृद्ध करते हैं, यदि हमें मातृभूमि के प्रति प्रेम है तो संकल्प लें कि विदेशी वस्तुओं का उपयोग नहीं करेंगे। दिलावर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने हरियाली राजस्थान अभियान के तहत अब तक 5 करोड़ पौधे लगाए हैं। इस अवसर पर उन्होंने पॉलिथीन का उपयोग न करने का भी आह्वान किया।

संस्कृत से आता जीवन में अनुशासन-
समारोह में झाडोल के संत गुलाबदास का भी सान्निध्य मिला। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति को समझाना है तो संस्कृत सहायक हो सकती है। वेद-पुराणों, उपनिषदों में न केवल जीवन का मर्म अपितु प्रकृति के गूढ़ रहस्य तक समाहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत से जीवन में अनुशासन आता है।

शिक्षक समाज के सहयोग से ही परिवर्तन संभव-  
समारोह के अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के निदेशक वाई एस रमेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति से परिवर्तन का शुभारंभ हुआ है। शिक्षक समाज के सहयोग के बिना इसमें सफलता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत संस्कृत शिक्षा में पैटर्न लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य है। संस्कृत शिक्षा में बाल वाटिका की पुस्तिकाएं तैयार करने वाला भी राजस्थान पहला राज्य है।

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