चित्तौड़गढ़। सप्तशक्ति संगम के अंतर्गत विद्या निकेतन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोलवलकर नगर, चित्तौड़गढ़ द्वारा संचालित मीराबाई सरस्वती संस्कार केंद्र, मानपुरा में मातृ सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। अतिथियों का परिचय केंद्र संचालिका लक्ष्मी कुमावत ने कराया।
सम्मेलन की मुख्य वक्ता सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम की सह जिला संयोजिका प्रेमलता महंत रहीं। उन्होंने “कुटुंब प्रबोधन” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नारी परिवार की केंद्र बिंदु होती है। शक्तिपुंज नारी ही प्रत्येक युग में परिवार और समाज को संस्कारित करती आई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, संस्कारों के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी मातृशक्ति के हाथों में है। संयुक्त परिवार व्यवस्था में ही बालक श्रेष्ठ संस्कारों के साथ एक उत्तम मानव के रूप में विकसित होता है।
विशिष्ट अतिथि विद्यालय की प्रधानाचार्या ललिता कुंवर राठौड़ ने वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए गैजेट्स के सीमित उपयोग तथा लव जिहाद जैसी समस्याओं से बच्चों को सुरक्षित रखने हेतु माताओं से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को समय और स्नेह देने से उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास स्वस्थ रूप से संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि राम जैसी श्रेष्ठ संतान प्राप्त करने के लिए स्वयं को कौशल्या बनाना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुमन जैन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने बालक के सर्वांगीण विकास में माता-पिता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया तथा गांव में संचालित संस्कार केंद्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे केंद्र प्रत्येक गांव और बस्ती में प्रारंभ होने चाहिए, जिससे बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी प्राप्त हों।
सम्मेलन में कुल 58 मातृशक्तियों की उपस्थिति रही। विद्यालय की बालिकाओं द्वारा रानी पद्मिनी, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई एवं दिव्य देवियों की झांकियों की प्रस्तुति दी गई, जिससे वातावरण दिव्यता से भर उठा।
कार्यक्रम का संचालन कुसुम कुमावत ने किया, जबकि प्रश्नोत्तरी का संचालन सुनीता कुमावत द्वारा किया गया। सही उत्तर देने वाली माताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की आचार्या निर्मला शर्मा ने सभी को प्रतिज्ञा दिलवाई। जिला सह-संयोजिका प्रेमलता महंत के निर्देशन में यह सम्मेलन सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।