उज्जैन। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने शुक्रवार को प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी ग्रामीण और जल निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की। कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। पानी की गुणवत्ता से संबंधित कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। ओवर हेड टेंक और पानी की टंकियों की साफ-सफाई नियमित रुप से होना चाहिए। सभी सीईओ जनपद पंचायत यह सुनिश्चित करें। ईई जल निगम और पीएचई विभिन्न जनपद पंचायतों में एई और एसडीओ के साथ भ्रमण करें और पेयजल की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करवाई जाए। अलग-अलग क्षेत्रों से पेयजल के सेंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच की जाए। टेस्टिंग किट सभी जगह पर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होनी चाहिए। पेयजल के स्त्रोंत के आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी न रहे यह सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि जल निगम द्वारा जल रेखा पोर्टल पर निर्मल मोड्युल के अंतर्गत पेयजल के सेंपल्स की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। इसके टेस्ट रिकार्ड ऑनलाईन उपलब्ध हैं। वर्तमान में जल निगम द्वारा उज्जैन जिले में 03 योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें अरनिया बहादुर, नागदा और इंदौख एमबीएस शामिल हैं। इंदौख के 678 सेंपल्स, अरनिया बहादुर के 1018 सेंपल्स और नागदा के 946 सेंपल्स का अभी तक परीक्षण किया जा चुका है।
जिले में जल जीवन मिशन के तहत एकल ग्राम नल जल योजना में 546 नियमित रुप से संचालित हैं। इसी प्रकार जिले के अंतर्गत वर्तमान में 9083 हैंडपंप क्रियाशील हैं। उक्त समस्त जल स्त्रोतों का निरंतर जल परीक्षण जिला स्तरीय प्रयोगशाला एवं उपखंड स्तरीय प्रयोगशाला में किया जाता है, जिसके तहत इस वर्ष 4214 जल स्त्रोतों का जल परीक्षण किया गया है तथा ग्राम जल स्वच्छता समिति द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से निरंतर जल परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही 45 सैम्पल्स का हर तिमाही में राज्य स्तरीय प्रयोगशाला से जल परीक्षण कराया जाता है। जिले में अभी तक जल प्रदूषण की कोई शिकायत विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रेयांस कूमट, ईई पीएचई ग्रामीण केएस खत्री, डीसी एसबीएम कविता उपाध्याय एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।