माउंट आबू। 33 करोड़ देवी देवताओं के वास कहे जाने वाले माउंट आबू में जिसे वशिष्ठ की नगरी और भगवान राम की पाठशाला भी कहा जाता है, मकर संक्रांति 14 जनवरी 2001 को माउंट आबू में जहां भगवान राम के समय के पहरेदार दक्षिण तट नक्की झीलभगवान हनुमान को नया चोला पहनाया गया था, और इसी दिन वेद माता गायत्री और सेतुबंध रामेश्वरम शिव मंदिर की प्रतिष्ठा की गई थी जिसको लेकर आठ दिवसीय मकर संक्रांति एवं रजत जयंती महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, आज सुबह 6ः15 बजे से देश के जाने-माने संत दुनिया के अकेले राम सर्वेश्वर रघुनाथ मंदिर के महंत डॉ आचार्य सियाराम दास जी महाराज के मुख्य आतिथ्य में एवं जाने-माने कथावाचक मयंक मिश्रा और हनुमान मंदिर के महंत मुरली दास जी महाराज के सानिध्य में भागवत कथा का समापन हुआ, साथ ही इस कार्यक्रम में माउंट आबू के 90 वर्ष से अधिक वृद्ध जनों का सोल उड़ा कर एवं स्मृति चिन्ह भेटकर सम्मान किया गया। जिसमें मंच पर सर्वप्रथम 96 वर्षीय घनश्याम आचार्य का महंत सियाराम दास जी महाराज ने उनके स्थान पर जाकर उनका सम्मान किया। इनके अलावा अन्य 10 वृद्ध जनों का भी सम्मान हुआ। कार्यक्रम को साधु संतों ने और अतिथियों ने संबोधित किया।