मंदसौर। कृषि उपज मंडी में बीते पांच दिनों से चले आ रहे हम्माल-व्यापारी विवाद का सीधा और सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। मंडी में लगातार खरीदी नहीं होने और अनिश्चितकालीन बंद की स्थिति के चलते किसानों की फसल खराब होने की आशंका गहराती जा रही थी। हालात ऐसे बन गए थे कि सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए किसान आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में घिर गए थे। हालांकि सोमवार को स्थिति में आंशिक सुधार देखने को मिला। मंडी परिसर में पहले से मौजूद किसानों का माल बेचना शुरू कर दिया गया और व्यापारियों ने खरीदी की प्रक्रिया आरंभ की, जिससे किसानों ने राहत की सांस ली।
दूर-दराज से आए किसान सबसे अधिक परेशान-
मंडी बंद रहने के कारण दूर-दराज के इलाकों से आए किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए। किसानों ने बताया कि वे सागर, झालावाड़ सहित अन्य जिलों और क्षेत्रों से अपनी उपज लेकर मंदसौर मंडी पहुंचे थे। परिवहन, कटाई, मजदूरी और अन्य खर्चों पर हजारों रुपये खर्च करने के बावजूद उनकी फसल न बिक पाने से भारी नुकसान की आशंका पैदा हो गई थी। कई किसानों को मजबूरी में अपनी उपज वापस ले जानी पड़ी, जबकि कुछ किसान समाधान की उम्मीद में मंडी परिसर में ही डटे रहे। किसानों का कहना था कि लंबे समय तक मंडी बंद रहने से न केवल उनकी फसल खराब होने लगी, बल्कि उन्हें उचित मूल्य मिलने की संभावना भी कम हो गई।
इस तरह शुरू हुआ हम्माल-व्यापारी विवाद
जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत 13 जनवरी को हुई। उस दिन मंडी में एक हम्माल जब माल उतारने गया, तभी व्यापारी के काउंटर पर रखी बारदाने की एक बोरी फट गई। इसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में मारपीट में बदल गई। घटना के बाद मंडी परिसर में तनाव का माहौल बन गया और हम्माल संघ व व्यापारी संघ आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच सहमति न बनने के कारण मंडी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
पांच दिनों तक ठप रही मंडी व्यवस्था-
13 जनवरी को विवाद के चलते मंडी आधे दिन बंद रही, 14 जनवरी को शासकीय अवकाश के कारण मंडी पूरी तरह बंद रही, 15 जनवरी को व्यापारियों ने किसानों का माल खरीदने से इनकार कर दिया। खरीदी बंद होने से नाराज किसानों ने मंडी के बाहर धरना प्रदर्शन किया और महू-नीमच हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
आश्वासन के बाद भी नहीं खुली मंडी-
मंडी सचिव पर्वत सिंह सिसोदिया ने किसानों को आश्वासन दिया था कि व्यापारियों से चर्चा कर मंडी को करीब साढ़े तीन बजे शुरू कर दिया जाएगा। इस भरोसे पर किसानों ने चक्का जाम समाप्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद खरीदी शुरू नहीं हो सकी। देर शाम से रात तक प्रशासनिक अधिकारियों, किसानों और हम्मालों के बीच लगातार बैठकों का दौर चला, लेकिन किसी भी बैठक से ठोस समाधान नहीं निकल सका।
अनिश्चितकालीन बंद से किसानों में मायूसी-
व्यापारियों और हम्मालों के बीच सहमति नहीं बनने पर मंडी प्रशासन ने गुरुवार रात कृषि उपज मंडी को आगामी आदेश तक बंद रखने की घोषणा कर दी। इस निर्णय से किसान पूरी तरह मायूस हो गए। कई किसानों ने अपनी फसल वापस ले ली, जबकि कुछ किसान अब भी मंडी परिसर में समाधान की उम्मीद लगाए बैठे रहे। किसानों का कहना था कि विवाद उनका नहीं था, फिर भी सजा उन्हें ही भुगतनी पड़ी।
मंडी सचिव का बयान-
कृषि उपज मंडी सचिव पर्वत सिंह सिसोदिया ने कहा कि 13 जनवरी को मंडी में व्यापारी और हम्मालों के बीच हुए विवाद के कारण दशपुर मंडी व्यापारी संघ और दशपुर मंडी हम्माल संघ के बीच आपसी सामंजस्य नहीं बन पाया। मंडी समिति द्वारा हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। आगामी आदेश तक मंडी प्रांगण में क्रय-विक्रय का कार्य बंद रहेगा। कृषक बंधु फिलहाल अपनी उपज मंडी में लेकर न आएं।
सोमवार से शुरू हुई खरीदी, नेताओं की मौजूदगी में बनी सहमति-
सोमवार को हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिला। मंडी में मौजूद किसानों का माल बेचना शुरू कर दिया गया और व्यापारियों ने खरीदी की। इससे किसानों को आंशिक राहत मिली। इस दौरान विधायक विपिन जैन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मंडी पहुंचे। विधायक विपिन जैन ने मंडी सचिव को चेतावनी देते हुए कहा अब यदि मंडी दोबारा बंद हुई तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। मैं सारे किसानों और हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मंडी के बाहर धरने पर बैठ जाऊंगा। विधायक की चेतावनी के बाद मंडी में हलचल तेज हुई और खरीदी प्रक्रिया में तेजी देखने को मिली।