चित्तौड़गढ़। जिले में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से साइबर पुलिस थाना चित्तौड़गढ़ एवं चित्तौड़गढ़ विकासखंड की ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समिति (BLBC) की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देश एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार के पर्यवेक्षण में उप पुलिस अधीक्षक मनीष शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई।
बैठक में विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों, बैंक अधिकारियों एवं साइबर पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर प्राप्त शिकायतों, GRM (Grievance Redressal Module) एवं MRM (Money Restoration Module) के माध्यम से दर्ज मामलों के त्वरित निस्तारण तथा साइबर ठगी से संबंधित राशि को समय पर होल्ड एवं रिकवर करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
साइबर पुलिस ने बैंक अधिकारियों को बताया कि वित्तीय साइबर अपराधों में शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में बैंक स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक बैंकिंग दस्तावेज, खाता विवरण, लेन-देन संबंधी जानकारी एवं अन्य तकनीकी सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बैठक में संदिग्ध म्यूल (Mule) खातों की पहचान, साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने तथा आमजन को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने पर भी सहमति बनी। बैंक अधिकारियों से कहा गया कि वे ग्राहकों को OTP, UPI PIN, फर्जी लिंक, निवेश संबंधी धोखाधड़ी एवं ऑनलाइन ठगी से बचाव के प्रति नियमित रूप से जागरूक करें तथा साइबर ठगी के पीड़ितों को उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।
बैठक का समापन साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस एवं बैंकिंग संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
बैठक में पुलिस निरीक्षक सुमन कुमार, सूचना सहायक मनोज गुर्जर, सहायक आयुक्त रोनक शर्मा (डीआईसी), लीड बैंक मैनेजर परेश टॉक, नाबार्ड के महेन्द्र डुडी सहित जिले के विभिन्न बैंक शाखाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।