मनासा। मनासा में गिलियन–बैरे सिंड्रोम (GBS) को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। शनिवार शाम एक मरीज की पुष्टि के बाद पिछले दो दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में कुल मरीजों की संख्या 18 पर ही स्थिर बनी हुई है। नए मामलों के सामने नहीं आने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनासा नगर में लगातार घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। अब तक 15 हजार से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। सीएमओ उमेश बसेर के अनुसार संदिग्ध एवं हल्के लक्षण वाले लोगों की भी नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि समय रहते उपचार कर बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।
मनासा सिविल अस्पताल में जीबीएस मरीजों के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान में अस्पताल में 25 ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। साथ ही इम्यूनोग्लोबिन (IVIG) इंजेक्शन के 25 डोज भी मौजूद हैं, जिससे गंभीर मरीजों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
पेयजल जांच में सुरक्षित पाया गया
पेयजल व्यवस्था को लेकर नगर परिषद सीएमओ रविश कादरी ने बताया कि नगर को जलापूर्ति करने वाले सभी प्रमुख स्रोत—बरड़िया संबवेल, विकासखंड स्थित कुआं, चम्बलेश्वर फिल्टर प्लांट एवं दशहरा मैदान स्थित ट्यूबवेल—से लिए गए पानी के सैंपल जांच में सुरक्षित पाए गए हैं और पानी पीने योग्य है। जिन क्षेत्रों से शिकायतें प्राप्त हुई थीं, वहां से भी सैंपल लेकर जांच कराई गई, जिनकी रिपोर्ट संतोषजनक रही। पेयजल संबंधी शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
अधिक क्लोरिनेशन से नलों में दिखा पीला पानी
नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. सीमा तिवारी ने बताया कि नगर में प्रदाय किया जा रहा पेयजल गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है और जांच में किसी भी प्रकार की बैक्टीरिया जनित अशुद्धि नहीं पाई गई है। हाल ही में क्लोरिनेशन की मात्रा बढ़ाने और फिल्टर प्लांट की सफाई के दौरान दवाइयों का अधिक उपयोग होने से कुछ क्षेत्रों में नलों से पीले रंग का पानी आया, जिसे लोगों ने गंदा पानी समझ लिया।
उन्होंने बताया कि 16 और 17 जनवरी को यह स्थिति बनी थी, लेकिन 17 जनवरी को लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट पूरी तरह ठीक पाई गई है। नगर परिषद द्वारा वार्डवार पानी की सैंपलिंग कराई गई है। नवंबर और दिसंबर माह में भी लगातार जांच कराई गई थी, जिनकी रिपोर्ट मानकों के अनुरूप रही।