मनासा। भक्ति, सेवा और सदाचार तीनों के बिना जीवन अधूरा है। श्रीमद भागवत हमें अहंकार त्यागकर प्रभु की शरण में जाने की सीख देती हैं। मन, वाणी और कर्म से प्रभु स्मरण करें। व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए।
यह बात कथावाचक पंडित भीमाशंकर शास्त्री ने कही। वे गांव मालाहेड़ा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन भक्त प्रह्लाद और भगवान की कृपा के प्रसंग पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सेवा ही सच्ची साधना है। समाज सेवा के बिना भक्ति अधूरी। कथा के दौरान शास्त्री ने उपस्थित भक्तों से कहा कि बच्चों में धर्म और नैतिकता का बीज बोएं। ताकि वे अपने सनातन धर्म को जान सके समझ सके। कथावाचक ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नित्य भजन, सत्संग और दान को जीवन का हिस्सा बने कथा पंडाल हरे कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। कथा के चौथे दिन पार्षद प्रतिनिधि और भाजपा नेता लालचंद राठौर, दिनेश राठौर ने पहुंचकर श्रीमद् भागवत के दर्शन कर कथावाचक से आशीर्वाद लिया।