उज्जैन। मध्य प्रदेश के मंदसौर एवं उज्जैन क्षेत्र में बीमा के नाम पर एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) की उज्जैन इकाई की जांच में सामने आया है कि बीमा पॉलिसियों के जरिए करीब 8 करोड़ रुपये की अवैध राशि प्राप्त करने का प्रयास किया गया। इस मामले में कुल 43 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
Eow एसपी समर वर्मा के अनुसार बीमा एजेंटों, पॉलिसी धारकों और नामिनी ने मिलकर पहले से गंभीर रूप से बीमार और मृत व्यक्तियों के नाम पर जीवन बीमा पॉलिसियां जारी कराईं। इसके बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य शासकीय दस्तावेज तैयार कर बीमा दावा प्रस्तुत किया गया।
मामले में दर्ज शिकायत क्रमांक 595/2025, दिनांक 03 सितम्बर 2025 के सत्यापन के बाद जांच प्रारंभ की गई। जांच में कुल 27 बीमा पॉलिसियों की पड़ताल की गई, जिनमें से 19 पॉलिसियों में अनियमितताएं पाई गईं, जबकि 8 मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर पॉलिसी ली गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में 10 से अधिक बीमा एजेंट शामिल हैं, जिनमें से कई ने एक से अधिक संदिग्ध पॉलिसियां जारी कीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्य संगठित नेटवर्क के रूप में किया जा रहा था।
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत स्तर के लोकसेवकों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि सरपंच, सचिव एवं सहायक सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए। जांच में उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के कुछ गांवों में भी इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हैं।
एसपी eow समर वर्मा के अनुसार अब तक 27 में से 6 मामलों की विस्तृत जांच की जा चुकी है, जबकि शेष मामलों में दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है। पूछताछ के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 417, 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी) एवं 120(बी) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और इस संगठित फर्जीवाड़े में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।