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July 31, 2026, 10:40 am
NEWS : जाति के आधार पर भेदभाव मानवता पर कलंक, सभी आत्माएं परमात्मा के समान हैं, राष्ट्र संत मुनि कमलेश ने कहा- मानव जन्म से नहीं, कर्म से महान होता है, पढ़े रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़/मैसूरु। स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में स्थानक भवन में चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मानव की महानता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से निर्धारित होती है। जन्म के आधार पर किसी को ऊंचा या नीचा मानना परमात्मा का अपमान और अज्ञानता का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि संपूर्ण मानव समाज की शारीरिक रचना एक समान है और सभी के रक्त का रंग लाल होता है। जन्म के समय किसी के माथे पर न तो जाति लिखी होती है और न ही धर्म। ऊंचे कुल में जन्म लेने वाला यदि नीच कर्म करता है तो वह महान नहीं कहलाता, वहीं सामान्य कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने श्रेष्ठ कर्मों से विश्व पूजनीय बन सकता है।

राष्ट्र संत मुनि कमलेश ने कहा कि यदि परमात्मा को भेदभाव स्वीकार होता तो उन्होंने मनुष्यों के रक्त का रंग भी अलग-अलग बनाया होता। उन्होंने विकृत वर्ण व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि सभी आत्माएं परमात्मा के समान हैं। जाति के आधार पर किसी का सम्मान या अपमान करना सरासर अन्याय है। भेदभाव का व्यवहार संपूर्ण मानवता पर कलंक है और दुर्व्यवहार करना हमारी संस्कृति को शर्मसार करने के समान है।

उन्होंने कहा कि चारों वर्ण प्रत्येक मनुष्य के भीतर विद्यमान हैं। जब हम साधना करते हैं तो ब्राह्मण हैं, व्यापार करते हैं तो वैश्य हैं, श्रम एवं सेवा करते हैं तो शूद्र हैं और अपनी तथा समाज की रक्षा के लिए खड़े होते हैं तो क्षत्रिय हैं। ऐसे में जातिगत भेदभाव का कोई औचित्य नहीं है। सभी महापुरुषों ने जातिवाद के विरुद्ध संघर्ष कर संपूर्ण मानवता को सम्मान, प्रेम और न्याय का संदेश दिया है।

मुनि श्री ने कहा कि छुआछूत का भाव रखने वाला व्यक्ति चाहे कितनी ही कठोर साधना कर ले या संत बन जाए, वह धार्मिकता के वास्तविक स्वरूप को प्राप्त नहीं कर सकता। मानवता को विभाजित करने वाला दृष्टिकोण सबसे बड़ा पाप है।

इस अवसर पर 30 जुलाई से 16 शुक्रवार तक पद्मावती देवी एकासना आराधना का शुभारंभ किया गया। करीब 80 तपस्वियों ने एकांतर तपस्या के सामूहिक पारणे में सहभागिता निभाई। धर्मसभा का मंगलाचरण कौशल मुनि एवं सक्षम मुनि ने किया, जबकि अक्षत मुनि एवं घनश्याम मुनि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मांगीलाल सेठिया, मोतीलाल दरला, गौतमचंद बम्ब, गुदड़मल खाबिया, प्रकाशचंद मुथा, चंदन बोहरा, किरण सालेचा, गौतमचंद सिंघवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सचिव बुधमल बाघमार ने किया।

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