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May 12, 2026, 12:55 pm
KHABAR : आजीविका मिशन से बदली जमुनियाखुर्द की तस्वीर, महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, 14 स्वयं सहायता समूह सक्रिय, ‘लखपति दीदी’ मीना खारोल की आय 2.88 लाख रुपये वार्षिक, पढ़े खबर 

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नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले के विकासखंड नीमच से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम जमुनियाखुर्द आजीविका मिशन की पहल से महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है। यहां की महिलाएं अब सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

2019 में शुरू हुई बदलाव की कहानी-
ग्राम पंचायत जमुनियाखुर्द में पहले कोई स्वयं सहायता समूह नहीं था। वर्ष 2019 में महिलाओं को संगठित कर घर से बाहर निकालकर समूह से जोड़ने की पहल की गई। आज इसी प्रयास का परिणाम है कि गांव में कुल 14 महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

स्वरोजगार से बनीं ‘लखपति दीदी’-
समूह से जुड़ी मीना खारोल सीआरपी-कृषि सखी एवं लखपति सीआरपी के रूप में कार्य कर रही हैं। वे एनआरएलएम योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ दिया-बत्ती निर्माण तथा ‘किराना एक बगिया माँ’ नाम से स्वरोजगार गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से उनकी आय लगभग 800 रुपये प्रतिदिन, 24 हजार रुपये मासिक तथा 2.88 लाख रुपये वार्षिक हो गई है। इससे वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार-
समूह से जुड़ने के बाद मीना खारोल के परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि अब पक्का मकान, ट्रैक्टर और बाइक जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा बच्चे बेहतर स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। उनकी देवरानी और सास भी कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों से लगभग 80 हजार रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। इससे पहले ये महिलाएं केवल घरेलू कार्य और मजदूरी तक सीमित थीं।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा- 
गांव में कई शिक्षित महिलाएं सामाजिक परंपराओं के कारण घर से बाहर नहीं निकलती थीं। मीना खारोल द्वारा शुरू की गई आजीविका गतिविधियों ने अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है, जिससे उनके परिवारों को भी आय के नए अवसर मिल रहे हैं।

समूह गतिविधियों से बढ़ी आय और निवेश-
स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने रिवॉल्विंग फंड से प्राप्त 10 हजार रुपये एवं अपनी बचत का उपयोग कृषि, पशुपालन एवं अन्य आय अर्जन गतिविधियों में किया है।

ग्रामीण विकास को मिली गति- 
मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयासों से स्वयं सहायता समूहों के गठन और बैंकिंग सहायता के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे ग्राम विकास को गति मिली है और पंचायत व्यवस्था भी सशक्त हुई है।

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