चित्तौड़गढ़। हरीश आंजना स्नातकोत्तर महाविद्यालय, छोटी सादड़ी में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं गुरु वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर आधारित प्रेरणादायी विचारों के साथ गुरुजनों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराज राजेश पण्डित (चारभुजा मंदिर) ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन के सच्चे पथप्रदर्शक होते हैं। गुरु के ज्ञान, संस्कार एवं आशीर्वाद से ही मनुष्य का व्यक्तित्व निखरता है और जीवन को सही दिशा मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं आजीवन कृतज्ञता का भाव बनाए रखने तथा उनके आदर्शों का अनुसरण करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जगन्नाथ सोलंकी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वाेच्च माना गया है। गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आभार व्यक्त करने का पावन अवसर है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दीपक मंडेला ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरु के बताए मार्ग पर चलकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं भावना मीणा (कला तृतीय वर्ष), लक्षिता साहू (कला द्वितीय वर्ष), रेणुका सालवी, खुशी आंजना (कला प्रथम वर्ष) तथा छात्र अक्षित शर्मा ने गुरु वंदना एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया। विद्यार्थियों ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं आदर बनाए रखने का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर प्रो. राहुल जोशी, कार्यालय अधीक्षक अजय कुमार यादव, प्रो. भगवानलाल कामड़, नसरीन आरा, गोविंद रजक, भैयालाल गायरी, चौथमल, नितेश सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रो. सपना बेस ने किया।