चित्तौड़गढ़। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर समता भवन, गांधीनगर में प्रवचन सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महासती श्री पूर्वीश्री जी म.सा. ने गुरु की महिमा और समर्पण के महत्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
महासती श्री पूर्वीश्री जी म.सा. ने कहा कि ष्गुरु और गोविंद दोनों खड़े हैं, किसके लागूं पाय...ष् गुरु ही हमें भगवान के मार्ग तक पहुंचाते हैं, इसलिए गुरु का वंदन सर्वाेपरि है। भगवान के वचनों पर स्वयं चलकर दिखाने वाला ही सच्चा गुरु होता है।
उन्होंने कहा कि बिना गुरु के जीवन के कठिन मार्ग पर चलना मुश्किल होता है। गुरु अपने जीवन, संयम, आचरण और समभाव से प्रेरणा देते हैं। जिस दिन गुरु के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण जाग जाता है, वही सच्ची साधना की शुरुआत होती है।
महासती ने हिलेरी के हिमालय आरोहण का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति ने असंभव को संभव कर दिखाया तो दूसरों में भी विश्वास जागा कि वे भी प्रयास कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार साधनाशील महापुरुषों का जीवन हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि गुरु के दर्शन और उनके जीवन को देखकर ऐसा अनुभव होता है जैसे आगम का अध्ययन कर लिया हो। गुरु कृपा से श्रद्धा और भक्ति का भाव बढ़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आत्मचिंतन करते हुए चातुर्मास के चार महीनों में जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर महासतीवर्याओं द्वारा संकल्प पत्र का वाचन किया गया। इससे पूर्व महासती श्री सुश्रियाश्री जी म.सा. ने चातुर्मास स्थान चयन के आधार एवं चातुर्मास के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रत्याख्यान करवाकर मंगल पाठ भी सुनाया।
कार्यक्रम में महिला समिति की रेखा जारोली, रेखा बोरदिया सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। वहीं श्रीमती सरोज सुराणा एवं रूपा चावत ने भी गीतों की प्रस्तुति दी। आदित्येन्द्र सेठिया एवं उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने संघ के संकल्प पत्र का वाचन किया।