प्रतापगढ़ शहर स्थित रामद्वारा में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के भंडारी संत संत श्री शंभूराम जी महाराज ने सामूहिक दीक्षा प्रदान की और अपने प्रवचनों में गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ष्गुरु बिना ज्ञान संभव नहीं, सद्गुरु ही जीवन के अंधकार को दूर कर प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में गुरु भक्त प्रतापगढ़ रामद्वारा पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज के स्वरूप के पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद तालाब स्थित रामद्वारा में स्वामी गिरधरदास जी महाराज एवं स्वामी रामदास जी महाराज के समाधि स्थलों पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। दिनभर श्रद्धालुओं ने संत शंभूराम जी महाराज के चरण पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संत शंभूराम जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि गुरु केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि चेतना का स्वरूप हैं। उन्होंने बताया कि श्गुश् का अर्थ अंधकार और श्रुश् का अर्थ प्रकाश है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा, समर्पण, श्रद्धा और विश्वास के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही आत्मकल्याण और ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम के दौरान संत श्री ने कई नए शिष्यों को सामूहिक दीक्षा भी प्रदान की। प्रवचन के बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अंत में विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।