मंदसौर। उपसंचालक, पशुपालन विभाग द्वारा बताया गया है कि ग्रीष्म ऋतु के माह अप्रैल, मई एवं जून में अत्यधिक तापमान होने के कारण पशुओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। हीट स्ट्रोक होने पर पशु सुस्त हो जाते हैं, सिर नीचे रखकर मुँह खोलकर साँस लेते हैं। पशु के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, मुँह से लार गिरने लगती है, श्वास गति तेज हो जाती है तथा नाक एवं नथुने सूख जाते हैं। इस स्थिति में पशुओं का दुग्ध उत्पादन अचानक कम हो जाता है।
हीट स्ट्रोक से बचाव हेतु पशुओं को चारा-दाना सुबह जल्दी एवं देर शाम को देना चाहिए, क्योंकि इनके पाचन से शरीर में ऊष्मा उत्पन्न होती है। दिन के समय पशुओं को हरा चारा देना चाहिए, जिससे आवश्यक खनिज तत्व एवं जल की पूर्ति होती है। पशुओं को स्वच्छ एवं ठंडा पानी दिन में चार से पाँच बार पिलाना चाहिए।
पशुओं को रखने का स्थान साफ, खुला एवं हवादार होना चाहिए। पशुशाला में टाट-बोरियाँ आदि भिगोकर लगाई जा सकती हैं। पंखों एवं पानी के फव्वारों का उपयोग भी किया जा सकता है। पशुओं को सुबह-शाम ठंडे पानी से नहलाना लाभकारी होता है।