राजगढ़। जिले के खिलचीपुर क्षेत्र के ब्यावरा कलां सेक्टर में शुक्रवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बाल सगाई और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा माध्यम बताया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि कम उम्र में बच्चों की शादी पर खर्च होने वाली राशि यदि उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण पर लगाई जाए, तो समाज तेजी से विकास की ओर बढ़ सकता है।
अहिंसा वेलफेयर सोसायटी और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में बाल विवाह के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों पर चर्चा की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गांव स्तर पर किए जा रहे जागरूकता प्रयासों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वे लगातार परिवारों को समझाइश देकर बाल विवाह रोकने का प्रयास कर रही हैं।
कार्यशाला में कहा गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और सपनों पर सबसे बड़ा असर डालता है। इसलिए समाज को बच्चों की शादी नहीं, बल्कि शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बाल विवाह रोकने के प्रयास किए जाएंगे
अहिंसा वेलफेयर सोसायटी के मनीष दांगी और रजनी प्रजापति ने कहा कि जिन परिवारों में बाल सगाई हो चुकी है, वहां संवाद और जागरूकता के माध्यम से बाल विवाह रोकने के प्रयास किए जाएंगे। परिवारों को कानून और बच्चों के अधिकारों की जानकारी भी दी जाएगी।
परियोजना अधिकारी प्रतिभा साहू ने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित और शिक्षित बचपन देना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में सुपरवाइजर सविता राय, ब्लॉक कॉर्डिनेटर कृष्णा लववंशी सहित सेक्टर की 60 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। अंत में सभी ने बाल सगाई और बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।