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June 12, 2026, 3:41 pm
KHABAR : क्रिकेट नही, अब फुटबॉल का खुखार, शहडोल के गांवों में गूंज रहा फीफा का जुनून, खिलाड़ी बोले- सपना सिर्फ वर्ल्ड कप देखने का नहीं, भारत को खिलाने का है, पढे़ खबर

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शहडोल। क्रिकेट का देश कहे जाने वाले भारत में अब फुटबॉल का जुनून भी नई पहचान बना रहा है। आदिवासी अंचल शहडोल का एक इलाका इन दिनों मिनी ब्राज़ील के नाम से चर्चा में है। जहां बच्चे से लेकर युवा तक फीफा वर्ल्ड कप के रंग में रंगे नजर आते हैं। कोई नेमार का फैन है तो कोई मेसी का, लेकिन सबकी आंखों में एक ही सपना है। एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप खेले। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाकर देश को फुटबॉल की नई ताकत बनाने का संकल्प ले रहे हैं।


मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक गांव है विचारपुर३ इस गांव को मिनी ब्राजील कहा जाता है। मिनी ब्राजील इसलिए, क्योंकि ये गांव आज फुटबॉल के उभरते सितारों का गढ़ बन गया है। विचारपुर गांव को फुटबॉल के प्रति दीवानगी और वहां की चार पीढ़िया फुटबॉल खेलती आ रही है, इसी मिनी ब्राजील के 4 खिलाड़ी ट्रेनिंग के लिए जर्मनी गए थे। विचारपुर के हर घर से एक शख्स नेशनल खेल चुका है, से चली आ रही खेल परंपरा के कारण मिनी ब्राजील कहा जाता है। विचारपुर गांव को मिनी ब्राजील के नाम से जाना जाता है।


पीएम मोदी यहां के खिलाड़ियों से कर चुके हैं मुलाकात
पीएम मोदी इस गांव में गए थे और इन युवा खिलाड़ियों से मिले थे, खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इसका जिक्र किया है। मैदान में सुबह की पहली किरण के साथ बच्चों से लेकर युवाओं तक की टोली फुटबॉल लेकर पहुंच जाती है। गांव की गलियों, स्कूल मैदानों और कच्चे मैदानों में हर दिन फुटबॉल का ऐसा जुनून दिखाई देता है मानो कोई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट चल रहा हो, खिलाड़ी बताते हैं कि ब्राजील उनकी पसंदीदा टीम जरूर है, लेकिन असली सपना भारतीय तिरंगे को फीफा के मंच पर लहराते देखने का है।


प्रतिभा भरपूर लेकिन संसाधनों की कमी
स्थानीय कोचों और खेल प्रेमियों का कहना है कि शहडोल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ संसाधनों और बेहतर प्रशिक्षण की, कई खिलाड़ी आर्थिक तंगी के बावजूद अभ्यास नहीं छोड़ रहे, कुछ युवा तो सोशल मीडिया और मोबाइल से अंतरराष्ट्रीय मैच देखकर नई तकनीक सीख रहे हैं। फुटबॉल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट के मुकाबले फुटबॉल गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बच्चों के बीच मेसी, नेमार और रोनाल्डो की चर्चा उतनी ही होती है जितनी किसी बॉलीवुड स्टार की।


शहडोल के इस मिनी ब्राज़ील में फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जुनून और भविष्य का सपना बन चुका है। मिट्टी के मैदानों से उठ रही ये आवाज अब सिर्फ ब्राजील या अर्जेंटीना की जीत तक सीमित नहीं, बल्कि भारत को फीफा के मंच तक पहुंचाने की उम्मीद बन गई है। अगर इसी जज्बे को सही दिशा और सुविधाएं मिल जाएं, तो वो दिन दूर नहीं जब शहडोल की धरती से निकला कोई खिलाड़ी दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर तिरंगा लहराता नजर आएगा।

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