जबलपुर। मध्य प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मानदेय के बकाया भुगतान के मामले में मप्र हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को वर्ष 2019 से 2023 तक के 48 महीने (4 साल) का 1400 करोड़ एरियर्स देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने एरियर्स पर 6 प्रतिशत ब्याज देने का एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया है।
2018 में मानदेय बढ़ाया, 2019 में अंशदान घटाया
साल 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,500 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 2019 में प्रदेश में सरकार बदलने पर राज्य सरकार ने अपना अंशदान घटा दिया।
इससे कार्यकर्ताओं का मानदेय 10 हजार रुपए और सहायिकाओं का 7 हजार रुपए मिलने के बजाय क्रमशः 10 हजार से कम और 5,500 रुपए तक सीमित हो गया।
इसी फैसले को चुनौती देते हुए आंगनबाड़ी संगठन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
एकलपीठ ने ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया था
हाई कोर्ट की एकलपीठ ने मानदेय में कटौती को अवैध बताते हुए सरकार को जून 2019 से जून 2023 तक के 48 महीने का एरियर्स 6ः ब्याज के साथ 120 दिन के भीतर देने का आदेश दिया था। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का लाभ देने के निर्देश भी दिए थे।
डिवीजन बेंच ने क्या कहा?
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अंशदान बढ़ाने के बाद राज्य सरकार का अपना हिस्सा कम करना उचित नहीं था। इससे आंगनबाड़ी कर्मियों को मिलने वाला वास्तविक लाभ कम हो गया। अदालत ने सरकार को पूर्व अंशदान बनाए रखने और चार साल का बकाया एरियर्स देने का निर्देश दिया।
6 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश हटाया
डिवीजन बेंच ने माना कि मूल याचिका में ब्याज की मांग का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था, इसलिए 6ः ब्याज देने का आदेश हटा दिया गया। हालांकि, ग्रेच्युटी का लाभ देने का आदेश बरकरार रखा गया।
हाईकोर्ट के फैसले से प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को वर्ष 2019 से 2023 तक का 48 महीने का बकाया एरियर्स मिलेगा। हालांकि, इस राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा। वहीं, ब्याज हटने से राज्य सरकार को अतिरिक्त वित्तीय भार से राहत मिलेगी।