नीमच। प्रदेशव्यापी अभियान के तहत बुधवार को सीपीएम और सीटू के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। स्थानीय कलेक्टर कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर श्रुति भयडिया को दिए गए ज्ञापन में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और कर्मचारियों को समय पर वेतन दिलाने की मांग की गई।
सीपीएम जिला सचिव पंकज नागदा और सीटू जिला महासचिव सुनील शर्मा ने बताया कि हाल ही में प्रदेश के कुछ जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के फैसले से आम जनता, विशेषकर गरीब वर्ग के लिए इलाज महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं, स्टाफ और बजट की कमी को दूर करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि एमटीएस कर्मचारियों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत कर्मचारियों और आशा कार्यकर्ताओं को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठनों ने सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण रोकने, एमटीएस कर्मचारियों का बकाया वेतन तत्काल जारी करने, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सों के रिक्त पद भरने तथा सरकारी अस्पतालों में दवाओं और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की समुचित व्यवस्था करने की मांग की।
इस दौरान कामरेड किशोर जवेरिया ने ज्ञापन का वाचन किया। कार्यक्रम में शैलेंद्र सिंह ठाकुर, नितेश यादव, निरंजन गुप्ता राही, बालकिशन खेर, अनीता सेन, मुकेश नागदा, दिनेश भगत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।