पुणे। आदिवासी पारधी समाज की प्रेरणास्रोत एवं समाजसेवा की मिसाल शेवराबाई ज्ञानदेव भोसले का 95 वर्ष की आयु में वृद्धावस्था के कारण निधन हो गया। उन्होंने सोमवार को पुणे जिले के हवेली तालुका स्थित नायगांव में अंतिम सांस ली। उनके निधन से आदिवासी पारधी समाज सहित सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
शेवराबाई भोसले ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार को शिक्षा, ईमानदारी और समाजसेवा के संस्कार दिए। उनके इन्हीं संस्कारों का परिणाम रहा कि उनके पुत्र नामदेव भोसले ने समाजसेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई, जबकि भास्कर भोसले साहित्यकार और सुनील भोसले पत्रकार के रूप में समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
वरिष्ठ विचारक डॉ. मधुकर आव्हाड ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नामदेव भोसले ने पारधी समाज को अपराध की छवि से बाहर निकालकर शिक्षा, सम्मान और मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया, जिसकी नींव शेवराबाई के संस्कारों में निहित थी।
समाज के उत्थान और प्रेरणादायी जीवन के लिए शेवराबाई भोसले को जीवनकाल में 29 राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल तथा वर्ष 2021 में तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी उन्हें विशेष सम्मान प्रदान किया था।
नायगांव में पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ विचारक डॉ. मधुकर आव्हाड, उद्योगपति जयवंत शितोले-पाटिल, सरपंच संभाजी खडके सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण और समाजजन उपस्थित रहे। शेवराबाई भोसले का जीवन समाज के लिए प्रेरणा और सेवा का प्रतीक माना जाता है।