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July 22, 2026, 4:08 pm
KHABAR : पुलिस का बड़ा फेलियर, चलते-चलते मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर तक पहुंच गए प्रदर्शनकारी पति पत्नी, पुलिस को भनक तक नहीं लगी, मीडिया पर उतरा गुस्सा, पढे़ खबर

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इंदौर। प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास की सुरक्षा व्यवस्था बुधवार को पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई। सुबह से सोशल मीडिया पर मंत्री के घर के बाहर बड़े प्रदर्शन की चर्चाएं और संदेश वायरल हो रहे थे। इसके बावजूद पुलिस पूरी तरह बेखबर नजर आई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रदर्शनकारी किसी बैरिकेड को फांदकर नहीं, बल्कि आराम से पैदल चलते हुए सुरक्षा घेरा पार कर सीधे मंत्री के घर तक पहुंच गए, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले प्रहलाद पांडे और संगीता पांडे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयान का विरोध करने पहुंचे थे। दोनों ने मंत्री के घर के बाहर पहुंचकर विरोध शुरू किया। 


मीडिया मौके पर पहुंची और कवरेज शुरू हुई, उसके बाद पुलिस हरकत में आई। तब जाकर दोनों को हिरासत में लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सुबह से संभावित प्रदर्शन की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल थी, मंत्री के घर के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग भी की गई थी, तो फिर प्रदर्शनकारी बिना किसी रोक-टोक के मंत्री के घर तक कैसे पहुंच गए? आखिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?


मीडिया से कथित बदसलूकी पर भी विवाद
घटना के दौरान एक और विवाद सामने आया। मौके पर मौजूद पत्रकारों का आरोप है कि परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कनवा ने मीडिया को कवरेज करने से रोका और कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। पत्रकारों ने मौके पर इसका विरोध जताया और मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर से करने की बात कही।


सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
मंत्री के घर के दोनों ओर बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल और समर्थकों की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी सीधे मुख्य सुरक्षा घेरे तक पहुंच गए। नगर निगम सभापति मुन्नालाल यादव सहित बड़ी संख्या में समर्थक भी मौके पर मौजूद थे। इसके बावजूद पुलिस की सक्रियता तब दिखाई दी, जब मीडिया ने पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।


अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस केवल बैरिकेड लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान बैठी थी? यदि प्रदर्शनकारी इतनी आसानी से मंत्री के घर तक पहुंच सकते हैं, तो वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। यह घटनाक्रम पुलिस की सुरक्षा तैयारियों में बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है।

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