नीमच। जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जब रतनगढ़ निवासी चांदमल पिता नंदराज चारण जनसुनवाई में गले में अपने आवेदनों और शिकायतों के दस्तावेजों की माला पहनकर पहुंचा। प्रशासन द्वारा लंबे समय से उसकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए उसने अपने शरीर पर घासलेट छिड़क लिया और आत्मदाह की चेतावनी दे दी।
अचानक हुए इस घटनाक्रम से कलेक्टर कार्यालय परिसर में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी स्तब्ध रह गए। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने चांदमल के हाथ में मौजूद माचिस छीनकर उसे आत्मदाह करने से रोका और समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया।
चांदमल चारण ने बताया कि वह लंबे समय से न्याय की आस में प्रशासन के चक्कर लगा रहा है। उसके अनुसार वह अब तक 11 बार जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन उसकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उसने आरोप लगाया कि किशनलाल पिता नंदराज चारण, निवासी गरवाड़ा द्वारा कसमारिया क्षेत्र की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, जबकि नंदराज पिता चुन्नीलाल चारण, निवासी गरवाड़ा ने आलोरी-गरवाड़ा स्थित शासकीय विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है।
फरियादी का आरोप है कि इन मामलों में कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उसने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर आरोपियों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई। लगातार अनसुनी किए जाने से वह मानसिक रूप से आहत और निराश हो गया।
चांदमल का कहना है कि जब उसकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरी में उसे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने के लिए कलेक्टर कार्यालय आना पड़ा। हालांकि, प्रशासन की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।
इस घटना ने जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि फरियादी द्वारा लगाए गए शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर क्या कार्रवाई की जाती है।
नोट रू समाचार में लगाए गए अतिक्रमण संबंधी आरोप फरियादी द्वारा जनसुनवाई में दिए गए आवेदन और उसके कथनों पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष अथवा प्रशासनिक जांच की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त होना शेष है।