नीमच। नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए नीमच पुलिस द्वारा लैंगिक अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को कठोर दंड दिलाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। विशेष न्यायालय (पॉक्सो) नीमच ने जुलाई 2026 में तीन अलग-अलग प्रकरणों में आरोपियों को कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने बताया कि पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक राकेश गुप्ता तथा उप पुलिस महानिरीक्षक निमिष अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिला पुलिस नाबालिग बालिकाओं की गुमशुदगी एवं उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे मामलों की विवेचना स्वयं पुलिस अधीक्षक स्तर पर नियमित रूप से मॉनिटर की जाती है, ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रह सकें और दोषियों को न्यायालय से कठोरतम दंड दिलाया जा सके।
प्रथम प्रकरण रू थाना नीमच सिटी (अपराध क्रमांक 642/2023)
वर्ष 2023 में 16 वर्ष से कम आयु की एक बालिका के लापता होने पर थाना नीमच सिटी में गुमशुदगी दर्ज की गई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बालिका को आरोपी तूफान उर्फ धन्ना भील के कब्जे से सुरक्षित बरामद किया। अनुसंधान में आरोपी द्वारा बालिका का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करना प्रमाणित हुआ। विशेष न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 376(3) एवं पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही पीड़िता को प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा भी की गई।
द्वितीय प्रकरण रू थाना मनासा (अपराध क्रमांक 235/2024)
दिनांक 6 मई 2024 को विद्यालय जाने के लिए घर से निकली अनुसूचित जाति वर्ग की एक नाबालिग छात्रा के वापस नहीं लौटने पर थाना मनासा में गुमशुदगी दर्ज की गई। पुलिस ने बालिका को बरामद कर आरोपी अरुण सिकलीगर को गिरफ्तार किया। अनुसंधान में यह स्थापित हुआ कि आरोपी ने बालिका का अपहरण कर उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया। डीएनए रिपोर्ट, चिकित्सकीय परीक्षण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम एवं एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत आजीवन कारावास सहित विभिन्न सजाओं से दंडित किया। न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर राशि दिए जाने की भी अनुशंसा की है।
तृतीय प्रकरण रू थाना जीरन (अपराध क्रमांक 145/2025)
दिनांक 4 मई 2025 को 16 वर्ष से कम आयु की एक बालिका विवाह समारोह के दौरान लापता हो गई थी। थाना जीरन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बालिका को आरोपी गोविंद भील के कब्जे से सुरक्षित दस्तयाब कर उसे गिरफ्तार किया। जांच में आरोपी द्वारा विवाह का झांसा देकर बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने एवं दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई। विशेष न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता एवं पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास एवं अर्थदंड सहित अन्य दंडों से दंडित किया तथा पीड़िता को प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा की।
उक्त तीनों प्रकरणों में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एवं एडीपीओ पारस मित्तल द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। वैज्ञानिक, चिकित्सकीय, दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष न्यायालय में अपराध सिद्ध कराने में सफल रहा।
पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने इन प्रकरणों में उत्कृष्ट कार्य के लिए अभियोजन अधिकारी पारस मित्तल, तीनों प्रकरणों के अनुसंधान अधिकारियों तथा न्यायालय में साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा जिला पुलिस की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। नाबालिगों के विरुद्ध अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को कठोरतम दंड दिलाना जिला पुलिस की प्रतिबद्धता है।
जिला पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा एवं गतिविधियों के प्रति सतर्क रहें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, गुमशुदगी अथवा अपराध की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा डायल-112 पर दें।