नीमच। श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच के हिन्दी विभाग द्वारा शुक्रवार को प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं की वक्तृत्व कला को निखारना एवं उन्हें प्रेमचंद के साहित्य से परिचित कराना था। विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम में सभी वक्तव्य छात्राओं द्वारा ही प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ छात्रा निहारिका द्वारा मुंशी प्रेमचंद के जीवन परिचय पर प्रकाश डालने के साथ हुआ। खुशी गुर्जर ने निर्मला उपन्यास के माध्यम से अनमेल विवाह के दुष्परिणामों को प्रस्तुत किया, वहीं आस्था ने शतरंज के खिलाड़ी में व्यसन के कारण होने वाली बर्बादी को रेखांकित किया। ट्विंकल ने प्रेमचंद के फटे जूते निबंध के माध्यम से प्रेमचंद के सादा जीवन एवं उच्च विचारों को व्यक्त किया।
जीनत ने गबन उपन्यास का कथासार प्रस्तुत करते हुए उसके संदेश को स्पष्ट किया, जबकि तनु ने प्रेमाश्रम के माध्यम से किसान जीवन के संघर्षों को रेखांकित करते हुए युवाओं को सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए आगे आने की प्रेरणा दी। खुशी शर्मा ने बड़े भाई साहब कहानी के जीवन मूल्यों, राजेश्वरी ने लॉटरी कहानी के माध्यम से परिश्रम के महत्व तथा योगिता ने गोदान के होरी के संघर्षपूर्ण जीवन को प्रस्तुत किया।
आंचल मेघवाल ने कफन कहानी की संवेदना एवं यथार्थ, टीना ने पूस की रात की मार्मिकता तथा आंचल अहीर ने बड़े घर की बेटी के माध्यम से बड़प्पन के महत्व को व्यक्त किया। महक शर्मा ने पंच परमेश्वर के जरिए निष्पक्ष न्याय व्यवस्था का संदेश दिया, जबकि फरजाना ने ठाकुर का कुआँ के सामाजिक यथार्थ को प्रस्तुत किया। अलिशा ने प्रेरणा कहानी के मूल संदेश को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी ने प्रेमचंद के नारीवादी चिंतन के संदर्भ में निर्मला उपन्यास की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके यथार्थवादी साहित्य को रेखांकित किया। उन्होंने छात्राओं को साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि छात्राओं को अगले दिन प्रेमचंद की कहानी शतरंज के खिलाड़ी पर आधारित फिल्म भी दिखाई जाएगी।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बीना चौधरी ने किया। इस अवसर पर डॉ. हीरसिंह राजपूत एवं प्रो. अविनाश बिहारिया सहित महाविद्यालय का शैक्षणिक स्टाफ एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।