मंदसौर। सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय, मंदसौर ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यहां पहली बार सुप्रा-मेजर सिस्टोलिथोटॉमी (मूत्राशय की विशाल पथरी निकालने की जटिल शल्यक्रिया) सफलतापूर्वक संपन्न कर 65 वर्षीय मरीज को नया जीवन प्रदान किया गया।
मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता डॉ. शशि गांधी ने बताया कि 65 वर्षीय गजेंद्र सिंह कई वर्षों से बार-बार होने वाली मूत्राशय की पथरी (रिकरेंट ब्लैडर स्टोन) की समस्या से पीड़ित थे। उन्होंने पूर्व में कई निजी अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हाल ही में पेशाब में रुकावट, दर्द एवं मूत्र त्याग में कठिनाई बढ़ने पर वे इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय पहुंचे, जहां जांच में मूत्राशय में विशाल पथरी (जायंट यूरिनरी ब्लैडर कैल्कुलस) पाई गई।
इसके बाद जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. ईशांत चौरसिया के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक सिस्टोलिथोटॉमी कर मूत्राशय से विशाल पथरी को सुरक्षित रूप से निकाल दिया। ऑपरेशन पूर्णतः सफल रहा और मरीज की स्थिति वर्तमान में स्थिर एवं संतोषजनक है।
शल्य चिकित्सा में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मारिया खेड़ीवाला, डॉ. रमेश यादव, डॉ. राहुल बिस्वास एवं डॉ. आकाश कुशवाह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. डीके पिप्पल एवं डॉ. पीसी आर्य ने सुरक्षित एवं प्रभावी एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।
मेडिकल कॉलेज में पहली बार इस प्रकार की सुप्रा-मेजर यूरोलॉजिकल सर्जरी की सफलता से अब जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को जटिल शल्य चिकित्सा के लिए इंदौर, उज्जैन अथवा अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों के समय, धन एवं अनावश्यक परेशानी की बचत होगी।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. शशि गांधी एवं सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.एस. रावत ने पूरी चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में आधुनिक एवं जटिल शल्य चिकित्सा सेवाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, ताकि क्षेत्र की जनता को अपने जिले में ही उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।