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August 21, 2026, 6:38 pm
KHABAR : एमडीएम एवं आंगनवाड़ी में कार्यरत महिला रसोइयों को मिले सम्मानजनक मानदेय, महिला स्वयं सहायता समूह संगठन की प्रदेश अध्यक्ष माया-मनोहर बैरागी ने मानदेय बढ़ाने की मांग उठाई, पढ़े दिनेश वीरवाल की खबर 

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नीमच। शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना के तहत कार्यरत महिला रसोइयों की भूमिका बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ये महिलाएं प्रतिदिन बच्चों के लिए भोजन तैयार कर शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय सीमित है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

महिला स्वयं सहायता समूह संगठन मध्यप्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष माया-मनोहर बैरागी ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में कम मानदेय से महिला रसोइयों के लिए परिवार की मूलभूत जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। भोजन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी आवश्यकताओं के खर्च का भार उठाने में उन्हें परेशानी होती है। कई महिलाओं को परिवार का जीवनयापन चलाने के लिए अतिरिक्त काम भी करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि महिला रसोइयां नियमित रूप से विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन उनके श्रम के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी का असर उनके परिवार और बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ता है। ऐसे में सरकार को उनकी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

बैरागी ने सरकार से मांग की कि एमडीएम एवं आंगनवाड़ी में कार्यरत महिला रसोइयों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। इसके साथ ही उन्हें सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर सम्मान के साथ अपना कार्य कर सकें।

उन्होंने कहा कि महिला रसोइयों का योगदान केवल भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से सीधे जुड़ी जिम्मेदारी निभाती हैं। इसलिए उनके श्रम और योगदान को उचित सम्मान देते हुए मानदेय में वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाए जाना जरूरी है।

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