शाजापुर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय शाजापुर के बालिका छात्रावास में छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक समस्याओं एवं तनाव से निपटने के संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय शाजापुर की नर्सिंग ऑफिसर टीना नागर एवं परामर्शदाता ऋतु मेवाड़ा उपस्थित रहीं।
उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाला तनाव, चिंता और दुःख अस्थायी होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में घबराने के बजाय अपने मन की बात किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को भावनात्मक समस्याओं को पहचानने, एक-दूसरे की बात ध्यानपूर्वक सुनने तथा आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में पोस्टर के माध्यम से भी छात्राओं को संदेश दिया गया कि “तनाव, चिंता, दुःख अस्थायी हैं। अपनी ऐसी अस्थायी भावनाओं के लिए कोई स्थायी निर्णय न लें।” छात्राओं को समझाया गया कि बात करने से समाधान की राह निकलती है। मन में चल रही परेशानियों और भावनाओं को मित्र, परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
मानसिक या भावनात्मक समस्या महसूस होने पर छात्राओं को टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 एवं 1800-891-4416 पर 24×7 निःशुल्क परामर्श उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में बालिका छात्रावास अधीक्षक श्रीमती ज्योति धाकड़ ने कहा कि छात्रावास में छात्राओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा एवं भावनात्मक कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने छात्राओं से अपनी समस्याएं बिना संकोच साझा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर बालक छात्रावास अधीक्षक श्री ओमप्रकाश पाटीदार ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है। मानसिक तनाव, अवसाद एवं नकारात्मक विचारों को समय रहते पहचानकर उचित मार्गदर्शन और सहयोग लिया जाए तो गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने तथा अपनी भावनाओं को परिवार, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाकर अवसाद, आत्मघाती विचारों एवं आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच एवं संवाद की संस्कृति विकसित करना रहा। साथ ही उन्हें यह संदेश दिया गया कि कठिन परिस्थितियों में अकेले संघर्ष करने के बजाय समय पर सहायता और सहयोग लेना समझदारी है।