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September 18, 2026, 3:27 pm
BIG NEWS : आखिर किसके इशारों पर बनी सूची, पंचायत में कौन था जिम्मेदार, पुराने रिकॉर्ड खुलेंगे तो सामने आएगा सच, कथित बिचौलिये कौन? पंचायत में किसकी चलती है? क्या सचिव और सरपंच, पढे़ खबर 

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नीमच। जिले की एक ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पंचायत में बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत हुए हैं, लेकिन कुछ मामलों में एक ही परिवार के एक सदस्य को पहले योजना का लाभ मिलने के बाद दूसरे सदस्य के नाम से भी आवास स्वीकृत होने की बात सामने आ रही है। और ऐसे नाम भी आए जो गांव के निवासी पहले थे अब नहीं है फिर भी आवास योजना का लाभ उन्हे मिला। गांव में ऐसे गरिब और जरूरतमंदो को नही मिला क्या पंचायत में दलालों की साठ-गाठ से गांव में एक ही परिवार में कई आवास मिले। 

मामला सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ सूची पर नहीं, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कथित बिचौलियों की भूमिका पर भी उठ रहे हैं। चर्चा है कि आखिर कौन लोग हितग्राहियों और पंचायत के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और किसके माध्यम से नाम सूची में शामिल कराने या योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है?

पुरानी सूची बताकर जिम्मेदारी से बचने का आरोप?
पंचायत सचिव का कहना है कि वर्तमान में सामने आ रही सूची पुरानी है और उनके द्वारा किए गए सर्वे की सूची कब आएगी, यह शासन स्तर की प्रक्रिया पर निर्भर है।

वहीं सरपंच का कहना है कि उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं रहती और वर्तमान सूची पहले की है।

ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि सूची पुरानी है तो उस समय सूची तैयार किसने की थी? सर्वे किसने किया था? नाम किस आधार पर जोड़े गए और सत्यापन किस स्तर पर हुआ?

कथित बिचौलिये कौन? पंचायत में किसकी चलती है?
ग्रामीणों के बीच अब कथित बिचौलियों को लेकर भी चर्चा है। सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति हितग्राहियों के नाम सूची में जुड़वाने, आवास स्वीकृत कराने या सरकारी प्रक्रिया में मदद के नाम पर सक्रिय है?

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर आरोप साबित हुए हैं। लेकिन यदि ग्रामीणों की शिकायतें सही हैं तो जांच का दायरा केवल वर्तमान सचिव या सरपंच तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

पुराने रिकॉर्ड खुलेंगे तो सामने आएगा सच
पूरे मामले में यह जांच जरूरी है कि आवास योजना की सूची कब तैयार हुई, उस समय पंचायत में कौन सचिव और सरपंच था, सर्वे किसने किया, ग्राम सभा में सूची का सत्यापन हुआ या नहीं और जिन परिवारों को पहले लाभ मिल चुका है, उनके दूसरे सदस्यों के नाम किस आधार पर सूची में शामिल हुए।

यदि पंचायत के पुराने रिकॉर्ड, हितग्राहियों की सूची, सर्वे रिपोर्ट और ग्राम सभा के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच होती है तो यह साफ हो सकता है कि मामला महज पुरानी सूची का है या फिर इसके पीछे कथित बिचौलियों और पंचायत स्तर की मिलीभगत का कोई खेल है।

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