दतिया। दतिया के पण्डोखर सरकार धाम पीठाधीश्वर त्रिकालदर्शी गृहस्थ संत गुरुशरण महाराज ने अपने दिव्य दरबार के दौरान दामोदर यादव द्वारा सनातन धर्म तथा साधु-संतों को लेकर की जा रही कथित अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैचारिक मतभेद और असहमति अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी धर्म, परंपरा अथवा साधु-संतों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग उचित नहीं है। दिव्य दरबार के लाइव प्रसारण के दौरान गुरुशरण महाराज ने दामोदर यादव का उल्लेख करते हुए उनके कथित बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें अपनी भाषा एवं आचरण में मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी।
पण्डोखर सरकार धाम पीठाधीश्वर ने कहा कि सनातन धर्म सहिष्णुता, संस्कार और सद्भाव की शिक्षा देता है। इसका अर्थ यह नहीं कि सनातन परंपरा तथा साधु-संतों के विरुद्ध लगातार अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाए और समाज मौन रहे। उन्होंने कहा कि आलोचना और वैचारिक विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकते हैं, किंतु विरोध की भी एक मर्यादा होती है।
उन्होंने अपने संबोधन में सनातन परंपरा की विशालता का उल्लेख करते हुए कहा कि संत समाज ने सदैव लोककल्याण, धर्म, संस्कृति और मानवता के लिए कार्य किया है। किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी संत से मतभेद होने के आधार पर संपूर्ण संत समाज अथवा सनातन परंपरा के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करना उचित नहीं माना जा सकता।
गुरुशरण महाराज ने दामोदर यादव को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बोलते समय शब्दों की मर्यादा और उसके सामाजिक प्रभाव का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने अंदाज में कड़ी फटकार लगाते हुए भविष्य में सनातन धर्म एवं साधु-संतों के संबंध में संयमित और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करने की बात कही।