भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेश में आंदोलन की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर लगातार आवाज उठाती रही है। पत्रकार वार्ता में मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक एवं संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे भी मौजूद रहे।
SIR के दौरान मतदाता सूची में बदलावों पर सवाल-
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब दो वर्षों से राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे मतदाता अधिकार, चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को मध्यप्रदेश में भी उठा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस जानना चाहती है कि कितने नाम किन कारणों से हटाए गए, कितने मतदाता स्थानांतरित हुए, कितने मतदाताओं की मृत्यु दर्ज हुई और कितने नाम डुप्लीकेट पाए गए।
पटवारी ने ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची के बीच हुए बदलावों का विधानसभा एवं बूथवार विवरण सार्वजनिक किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका नाम मतदाता सूची में है या नहीं और यदि नाम हटाया गया है तो उसका कारण क्या है।
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर SIR-2026 से संबंधित मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल-
पटवारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। उन्होंने आयोग की स्वतंत्रता एवं विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफे की मांग किए जाने की बात कही गई।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई आपराधिक कृत्य प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
Form-6 और Form-7 की प्रक्रिया का उल्लेख-
पटवारी ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए Form-6 और नाम हटाने के लिए Form-7 की प्रक्रिया निर्धारित है। कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया, उसके कानूनी आधार और सत्यापन की जानकारी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक की जाए।
28 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन-
पटवारी ने घोषणा की कि 28 सितंबर को मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ता भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय का घेराव करेंगे। इसके अगले दिन 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग-
पटवारी ने आगामी पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची, मतपत्र और मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अपना पक्ष आगे भी रखेगी।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से चुनाव संबंधी प्रक्रिया में निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अनुचित लाभ नहीं मिलना चाहिए।
कांग्रेस ने उठाए ये सवाल-
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस जानना चाहती है कि मतदाता सूची से किसका नाम हटाया गया, किस आधार पर हटाया गया, सत्यापन किस अधिकारी ने किया, मतदाता को इसकी सूचना कब दी गई, दावे-आपत्तियों का अवसर कैसे दिया गया और कितने नाम दोबारा जोड़े गए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आने वाले दिनों में गांव और बूथ स्तर तक जाकर मतदाता सूची की स्थिति की जानकारी लेगी तथा जिन मतदाताओं को नियमानुसार शिकायत या अपील की आवश्यकता होगी, उन्हें प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल-
पटवारी ने 2023 में बने मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून का उल्लेख करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। मौजूदा कानून के अनुसार चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें राजनीतिक प्रभाव की आशंका न्यूनतम हो और जनता का विश्वास मजबूत हो।
उन्होंने EVM, VVPAT और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का संस्थागत एवं तकनीकी स्तर पर पारदर्शी जवाब देने की मांग की। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य मतदाता के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़े मुद्दों को उठाना है।