नीमच। शहर में मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भूमि उपलब्ध कराने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। नगर पालिका परिषद द्वारा समय-समय पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद अब तक भूमि आवंटन नहीं होने को लेकर समाज की ओर से शासन-प्रशासन से मामले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। समाज का कहना है कि यदि परिषद स्तर से प्रस्ताव पारित किए गए थे तो उन पर शासन स्तर पर हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
जानकारी के अनुसार वर्ष 1994 से विभिन्न समाजों एवं संस्थाओं को सामाजिक गतिविधियों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चलती रही है। इसी दौरान मुस्लिम समाज की आवश्यकताओं को लेकर भी नगर पालिका परिषद स्तर पर प्रस्ताव पारित किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों के बावजूद मुस्लिम समाज को अब तक भूमि आवंटित नहीं हो सकी है।
मामले को लेकर समाज की ओर से सवाल उठाया गया है कि नगर पालिका परिषद द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद फाइल किस स्तर पर आगे बढ़ी, शासन स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और भूमि आवंटन की प्रक्रिया अब तक लंबित क्यों है। समाज का कहना है कि इन बिंदुओं की जानकारी सार्वजनिक होने से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी हारून रशीद कुरैशी ने कहा कि सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सभी समाजों के लिए समान अवसर की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि नगर पालिका परिषद ने मुस्लिम समाज की आवश्यकता को देखते हुए प्रस्ताव पारित किए थे तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 1994 से अब तक मुस्लिम समाज के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा पारित प्रस्तावों, उनके आधार पर की गई कार्रवाई तथा शासन स्तर पर भूमि आवंटन की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि किसी स्तर पर प्रस्ताव या प्रक्रिया लंबित है तो उसके कारणों की जानकारी भी सामने लाई जाए।
कुरैशी ने कहा कि मुस्लिम समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए भूमि की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि परिषद में प्रस्ताव पारित होने के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने से समाज में असंतोष है। उन्होंने प्रशासन से पुराने प्रस्तावों एवं उनकी वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यह मामला किसी समाज के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि समान अवसर और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा है। शासन-प्रशासन को पुराने प्रस्तावों की समीक्षा कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया और उसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि मुस्लिम समाज की सामाजिक एवं सामुदायिक जरूरतों के संबंध में स्थिति साफ हो सके।