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December 8, 2022, 12:20 pm
KHABAR : गर्भधारण से प्रसव होने तक दो विभागों की निगरानी में रहेगी हाई रिस्क वाली महिला, कुपोषण उन्मूलन के लिये हेलापडावा से प्रारम्भ हुआ अभियान, पढ़े प्रदीप महाजन की खबर 

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खरगोन। जिले में कुपोषण उन्मूलन के लिए झिरन्या तहसील के हेलापडावा सेक्टर से अभियान की शुरुआत हुई है। करीब 1 माह की तैयारियों के बाद महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग ने एक नई सोच और दिशा के साथ से अभियान प्रारम्भ किया है। ज्ञात हो कि गत 24 नवम्बर को कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में आंकड़ों में महिलाओं को देखने और उनका उपचार कर आने वाली कुपोषित पीढ़ी के उन्मूलन के लिए योजना का खांका तैयार कर क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे।  योजनानुसार जिले के 82 सेक्टरों के 82 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। अभियान के योजनानुसार चिन्हित महिलाओं के प्रसव होने तक स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग निगरानी करेंगे। इसी तारतम्य में बुधवार से स्वास्थ्य शिविरों की श्रृंखला प्रारम्भ हुई है। इस शिविर में 4 डॉक्टरों के अलावा, आरबीएसके की टीम, 2 फार्मासिस्ट, 2 स्टॉप नर्स, 1 लेब टेक्नीशियन, हेलापडावा और रायलबेडा के सभी सीएचओ, 3 एएनएम, कोठा, मलगांव और हेलापडावा कि सभी आशा सुपरवाइजर और कार्यकर्ता तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सुपरवाइजर उपस्थित रही। 

215 में से 20 महिलाएं हाई रिस्क और 59 का सोलिबिलिटी टेस्ट पॉजिटिव-
स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम अधिकारी मनीष भद्रावले ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य शिविर में 20 गांवों की 229 महिलाओं व बच्चों का पंजीयन किया गया। जिसमें 215 गर्भवती माता बहनों और 14 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में 5 बच्चें गंभीर कुपोषित और 40 महिलाएं हाईरिस्क पायी गई। साथ ही 209 महिलाओं की सिकल सेल जांच में 59 सोलिबिलिटी टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। इनके अलावा 18 गर्भवती महिलाएं गंभीर एनिमिक चिन्हाकित हुई है। शिविर में जांच शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि, डॉ. शुभम गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचिता पलेरिया, डॉ. प्रज्ञा चौहान द्वारा हीमोग्लोबिन, यूरिन एल्ब्यूमिन, रक्तचाप, सिकलसेल, वजन, ऊंचाई, ब्लड शुगर और अन्य तरह की आवश्यक जांच की गई। 

जांच के बाद मिला उपचार, प्रति सप्ताह सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यक्रता करेगी जांच-
शिविर के दौरान 40 हाईरिस्क पायी गई महिलाओं को उसी दौरान आयरन सुक्रोस लगाया गया। वही 18 गंभीर एनिमिक गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल लाकर ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जायेगा। इसके अलावा आवश्यक्तानुसार आईएफए और कैल्शियम की टेबलेट प्रदाय की गई। महिला बाल विकास और डॉक्टरों द्वारा गर्भवती महिलाओं को पोषाहार डायट के बारे में भी बताया गया। कुपोषित पाये गए बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया जाएगा। साथ ही पोषण आहार के सम्बंध में माताओं को जानकारी दी गई। अब आगे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता निरंतर फॉलोअप करेगी, आवश्यक होने पर एएनएम और फिर सीएचओ


महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी रत्ना शर्मा ने बताया कि शिविर में चिन्हाकित हुई गंभीर व हाई रिस्क महिलाओं के साथ-साथ कुपोषित बच्चों का लगातार फॉलोअप लिया जाएगा। इसके लिए एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के जिम्मे 4 से 5 हाई रिस्क और गंभीर एनिमिक महिला आएगी। जिन्हें निरन्तर ट्रेक किया जाएगा। आवश्यक होने पर आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता एएनएम और फिर सीएचओ को जानकारी देकर उपचार व परामर्श किया जाएगा। साथ ही दोनों विभाग इनकी एक-एक फाइल भी तैयार करेगा। जिसके आधार पर आगे स्वास्थ्य जांच और आवश्यक होने पर उपचार सम्भव हो सके।

पिछले 5 वर्षों में कुपोषण की यह है स्थिति-
महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कुपोषित बच्चों की स्थिति इस प्रकार है। वर्ष 2017-18 में 5399, 18-19 में 3693, 19-20 में 2527, 20-21 में 2703 और 2021-22 में 3178 कुपोषित बच्चें थे। कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि कुपोषित पाये गए बच्चों की निरंतर निगरानी के बाद एनआरसी में भी भर्ती कराया जाता है।

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