मंदसौर। आज दिनांक 13 दिसम्बर 2022 को चरणबंध आंदोलन की अगली कड़ी में विरोध प्रदर्शन स्वरूप समस्त संविदा स्वस्थ्य कर्मचारीयो द्वारा गांधी चौराहा मन्दसौर में काले गुब्बारे उड़ाकर विरोध प्रदर्शन किया और अवगत कराया की मांगे न मानी जाने पर 15 दिसम्बर से अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।
लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश में लगभग 32000 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कार्यरत है जो की विगत 1 से 20 वर्षो से लगातार कार्यरत है जिन्होने कोरोना काल के दौरान भी अपनी जान हथेली पर रखकर लगातार स्वास्थ्य सेवाऐ दी है जिसमें अपने कई साथियों को भी खोया है। मध्यप्रदेश शासन काल द्वारा संविदा कर्मचारियों के लिए केबिनेट में 5 जून 2018 की नीति सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी की गई थी जिसके अनुसार खेल युवा कल्याण विभाग, महिला बाल विकास विभाग, राजस्व विभाग, पशुपालन विभाग, लोक सेवा प्रबंधन विभाग, स्थानीय निधि संपरीक्षा म.प्र. प्रकोष्ठ भोपाल आदि में लागू की जा चुकी है परन्तु एनएचएम के संविदा कर्मचारियों पर आज दिनांक तक लागू नहीं की गई। विगत वर्ष 2021 में आंदोलन के दौरान एनएचएम द्वारा जारी पत्र क्र एनएचएम/एचआर/2021/8753 दिया गया था। जिसमें कहा गया था कि जून के द्वितीय सप्ताह 2021 तक वित्त विभाग से अन्तिम निर्णय लेकर 5 जून 2018 की नीति लागू कराई जावेगी जो कि आज दिनांक तक लंबित है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की मांगों के संदंर्भ में-
मध्यप्रदेश के एनएचएम के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को अन्य राज्यों की भांति नियमित किया जावे तथा नियमित की प्रक्रिया के प्रचलन में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक-सी-5-2/2018/1/1/3, 5 जून 2018 की नीति लागू कर उसके अनुसान नियमित कर्मचारियों का न्यूनतम 90 प्रतिशत वेतन एवं अन्य सुविधाऐ आज दिनांक तक एरियर सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के समस्त संविदा कर्मचारियों को तत्काल आदेश करने का कष्ट करें।
एनएचएम सपोर्ट स्टाफ को आउट सोर्सिग से हटाकर तत्काल एनएचएम में वापस लिया जाए तथा बीमॉक लेखापाल, मलेरिया एमपीडब्ल्यू व अप्रेजल से निष्काशित कर्मचारियों को तत्काल एनएचएम में वापस लिये जाने संबंधित आदेश प्रदान करे।
उपरोक्त कार्यो के बाद भी यदि शासन द्वारा मांगों पर आदेश जारी नहीं होते तो दिनांक 15 दिसम्बर 2022 से प्रदेश के समस्त 32000 हजार एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन कलम बद्ध हड़ताल पर चले जायेगें जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।