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December 25, 2022, 2:45 pm
REPORT : 234 प्रतिभागियों ने पंजीयन करवाया, 4 सत्रों में 42 प्रतिभागियों ने शोध पत्र का किया वाचन, राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का हुआ समापन, पढ़े खबर 

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खरगोन। पीजी कॉलेज खरगोन में शनिवार को राष्ट्रीय शोध संघोष्ठी के समापन पर विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों ने नई शिक्षा नीति एवं उद्यमशीलता संभावनाएं एवं चुनौतियाँ विषय पर वैचारिक मंथन किया। प्राचार्य डॉ. आरएस देवड़ा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि संगोष्ठी में आये अतिथियों और विषय विशेषज्ञों द्वारा किये गए वैचारिक मंथन से हमारा समाज और राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर और अधिक सुगमता से आगे बढ़ पाएगा। खरगोन विधायक रवि जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को महत्वपूर्ण बताते हुए बदलते परिवेश के साथ नीति में बदलाव को स्वागत योग्य बताया। उद्यमशीलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति का केंद्र है और यह परिवार, समाज और राष्ट्र के  उत्थान के लिए आवश्यक है। वहीं मुख्य वक्ता प्राध्यापक, स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दे.अ.वि.वि. इंदौर के डॉ. सखाराम मुजाल्दे ने वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों को स्पष्ट  किया। जिस प्रकार संस्कृति और अर्थव्यवस्था में बदलाव आते हैं ठीक उसी प्रकार शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की आवश्यकता थी जिसके परिणाम स्वरूप नई शिक्षा नीति का प्रारूप हमारे समक्ष लाया गया है। उद्यमशीलता का होना आवश्यक है तभी हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदमताल मिलाकर चल पाएंगे। नई शिक्षा नीति स्वयं में इन सभी घटकों को समाहित करती है।        

विशेष अतिथि संस्कृत महाविद्यालय इंदौर की प्राचार्य डॉ. अरुणा कुसुमाकर ने उद्बोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय करण करने का प्रयास किया गया है। साथ ही व्यवसायिक शिक्षा को भी महत्व दिया गया है। उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने से हमारे निर्यात में वृद्धि और आयात प्रतिस्थापन को बल मिलेगा। नई शिक्षा नीति को लागू करने में हमारे समक्ष पूंजी का अभाव, संसाधनों का पूर्ण उपयोग ना होना जैसी चुनोतियाँ विद्यमान है। जिन्हें प्रतिबद्धता के साथ कार्य करके पूरा किया जा सकता है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से भारत की प्रतिभाओं को विदेशों में जाने से रोका जा सकेगा और उन्हें यहीं पर सम्मानजनक कार्य उपलब्ध कराए जा सकेंगे। वहीं विशेष अतिथि प्राध्यापक इंदौर डॉ. एमडी सोमानी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा उद्यमशीलता विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया है तथा प्रत्येक विद्यार्थी की पहुंच तक शिक्षा को सुलभ करने का कार्य किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति को लागू करने में हमारे समक्ष अनेक चुनौतियां आएगी लेकिन सभी के सहयोग और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से हम इसे सफलतापूर्वक लागू कर पाएंगे और इसके उद्देश्यों को भी प्राप्त कर सकेंगे।      

जनभागीदारी समिति अध्यक्ष दीपक कानूनगो ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहां कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति के मूलभूत सिद्धांत और अनुशासन को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी। शिक्षण संस्थानों और उद्योगों में समन्वय स्थापित करके  इन्हें आपस इंटरलिंक करने की आवश्यकता है। आयोजन सचिव प्रो. जैनुल जिलानी ने दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संगोष्ठी में कुल 234 प्रतिभागियों ने पंजीयन करवाया एवं सहभागिता की। साथ ही दो दिवस के कुल 4 सत्रों में 42 प्रतिभागियों ने शोध पत्र का वाचन किया। 22 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन जुड़कर सहभागिता की।
इससे पूर्व राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में 22 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। तकनीकी सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. अनिल सोनवणे, सह प्राध्यापक, आरसी पटेल महाविद्यालय, शिरपुर महाराष्ट्र रहे। अध्यक्षता डॉ. अमित कुमार पांचाल, सहायक प्राध्यापक, पीजी कॉलेज सेंधवा विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। तकनीकी सत्र में प्रथम शोध पत्र डॉ. हरिराम पाटीदार ने प्रस्तुत कर नई शिक्षा नीति में प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप का महत्व बताया। साथ ही फाइंडिंग के रूप में बताया कि यह नीति 50ः विद्यार्थियों को रोजगार देने में सफल हुई है। प्रोफेसर गिरीश शिव ने एस्पेक्ट्स एनईपी 2020 फॉर बायो साइंस ग्रैजुएट्स विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया और एनईपी में डिग्री कोर्सेस की प्रक्रिया बताई। तकनीकी सत्र में जितेंद्र सोलंकी, अशोक कोचले, डॉ. सेवंती डावर, डॉ. अनुराधा सिंगोरिया, डॉ. सीएस चौहान, डॉ. ममता गोयल आदि ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्र के अंत में मुख्य अतिथि उद्बोधन में डॉ सोनगरे ने एनईपी को सुदृढ़ बनाने और शिक्षा बजट का नई शिक्षा नीति में योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं डॉ. अमित पांचाल ने बताया कि शोधार्थी को कैसे शोध पत्र बनाना चाहिए और उसे कैसे प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति का छात्र विकास तथा एकेडमिक विकास में योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किये। इस तकनीकी सत्र में विभिन्न प्रस्तुत शोध पत्रों की रिपोर्टिंग डॉ. ओंकार सिंह मेहता एवं डॉ. जियालाल अकोले ने की। तकनीकी सत्र का प्रबंधन प्रो. जिलानी ने किया।      

संगोष्ठी का संचालन डॉ. रंजीता पाटीदार ने किया तथा आभार संगोष्ठी संयोजक डॉ. जीएस चौहान ने माना। तथ्य संकलन एवं प्रतिवेदन लेखन का कार्य डॉ. गणेश पाटिल एवं डॉ. तुषार जाधव ने किया। इस अवसर पर नगरपालिका उपाध्यक्ष भोलू कर्मा, महाविद्यालय का समस्त स्टॉफ व अन्य राज्यों से पधारे प्रतिभागी प्राध्यापक गण तथा बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे।

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