चीताखेड़ा। गांव में आज भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। जिसमे गांव के सभी वर्ग के लोग जुलुस का हिस्सा बने। वहीं मुस्लिम समाज ने पुष्प वर्षा कर जुलुस का स्वागत किया।
भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है। भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था। ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था। इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृन्दावन स्थित श्री बाँके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं। उक्त जानकारी हस्तरेखा विशेषज्ञ पंडित शिवशंकर शर्मा ने दी।